

मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) की तरफ से आयोजित काउंसलिंग राउंड-1 से अलॉट की गईं एमबीबीएस/बीडीएस सीट पर फ्रीज-ऑप्शन का चयन करने वाले छात्रों को अब रेजिग्नेशन प्रोसेस पूरा करना होगा. ऐसा नहीं करने पर उनकी सिक्योरिटी मनी वापस नहीं दी जाएगी. फ्रीज की गई सीट को छोड़ने के लिए आज यानी 15 सितंबर को आखिरी दिन है, इसके बाद ऐसा करने का मौका नहीं दिया जाएगा. इसके लिए शाम 6 बजे तक का वक्त दिया गया है और सबसे जरूरी बात ये है कि अभ्यर्थियों को खुद संस्थान में जाकर ये काम करना होगा.
किन्हें करना होगा रिजाइन?
एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया कि इसे लेकर कुछ दिन पहले नोटिफिकेशन जारी किया गया था. ये नोटिस उन छात्रों के लिए है, जिन्होंने काउंसलिंग राउंड-1 के सीट-अलॉटमेंट के दौरान फ्रीज ऑप्शन चुना था, यानी अपनी सीट सिक्योट कर ली थी, लेकिन अब उनका मन बदल चुका है और वो किसी दूसरे कॉलेज में एडमिशन लेने जा रहे हैं. ऐसे छात्रों को फ्रीज की गई सीट से रिजाइन करना होता है, जिसके बाद उनकी सिक्योरिटी मनी वापस मिल जाती है.
कॉलेज में मौजूद होना जरूरी
जिन छात्रों ने सीट फ्रीज करवाई थी, उन्हें अब फिजिकली मौजूद होकर अपनी इस सीट से रिजाइन करना होगा. रिजाइनिंग की प्रक्रिया के तहत आवंटित मेडिकल-संस्थान के नोडल ऑफिसर की तरफ से एमसीसी पोर्टल से रेजिग्नेशन लेटर ऑनलाइन जनरेट किया जाएगा. देव शर्मा ने बताया कि इस ऑनलाइन जनरेट किए गए रेजिग्नेशन लेटर के तहत किए गए रिजाइन ही मान्य होंगे, अन्य रेजिग्नेशन मान्य नहीं होंगे. रेजिग्नेशन की इस प्रक्रिया में छात्र की सिक्योरिटी राशि जप्त नहीं की जाएगी.
कितनी होती है सिक्योरिटी?
सरकारी सीटों यानी 15% ऑल इंडिया कोटे के लिए सीट रिजर्व करने की फीस थोड़ी कम है. सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए ये 10 हजार रुपये है और आरक्षित वर्ग यानी SC/ST/OBC/PwD को 5 हजार रुपये की सिक्योरिटी देनी होती है. वहीं स्टेट कोटा में ये फीस 30 हजार रुपये के करीब होती है. हालांकि डीम्ड यूनिवर्सिटी में सिक्योरिटी के तौर पर 2 लाख रुपये जमा कराने होते हैं.
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