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NATO के बाद अब EU ने भी यूक्रेन को सदस्य बनाने से किया इन्कार, रूसी खुफिया एजेंसी का दावा | After NATO the EU has now also refused to grant membership to Ukraine claims Russian intelligence agency



न खुदा ही मिला न विसाले सनम
न इधर के हुए न उधर के हुए

यह शेर अमूमन हर व्यक्ति ने कभी न कभी अपने जीवन में सुना होगा. 1991 में सोवियत संघ टूटा तो रूस से यूक्रेन अलग हुआ. उसके बाद धीरे-धीरे यूक्रेन का झुकाव अमेरिका और यूरोप की ओर बढ़ने लगा. रूस को ये अपने लिए खतरा लग रहा था. आखिरकार यूक्रेन ने 2014 में रूस समर्थक राष्ट्रपति को हटा दिया. 

क्यों शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध

तब रूस ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया और फिर पूर्वी यूक्रेन के अलगाववादियों का समर्थन कर दिया. इसके बाद यूक्रेन अपनी सुरक्षा के लिए नाटो में शामिल होने की कोशिश करने लगा. जब रूस के सब्र की सीमा पार हो गई तो फरवरी 2022 में ये तनातनी पूर्ण युद्ध में बदल गई. युद्ध बढ़ा तो नाटो ने यूक्रेन को शामिल करने से मना कर दिया. क्योंकि इससे अमेरिका सहित सभी देशों को इस युद्ध में शामिल होना पड़ता. फिर यूक्रेन को कहा गया कि उसे यूरोपियन यूनियन में शामिल होने के लिए आवेदन देना चाहिए. अब इस पर भी रूस की खुफिया एजेंसी ने बड़ा दावा किया है. 

रूस की खुफिया एजेंसी का दावा

रूस की फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस (SVR) ने एक बयान में कहा है कि यूरोपीय नेता अंदरूनी बातचीत में भविष्य में यूक्रेन के यूरोपीय संघ (EU) में शामिल होने की संभावना को खारिज कर रहे हैं. एजेंसी ने “यूक्रेन के EU भविष्य की कल्पना” का जिक्र करते हुए कहा, “SVR को मिली रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय नौकरशाहों द्वारा ‘उज्ज्वल भविष्य’ में यूक्रेन के EU सदस्य बनने के बारे में बड़े-बड़े भाषण देने के बावजूद, यूरोपीय नेताओं ने अंदरूनी बातचीत में ऐसी किसी संभावना से सख्ती से इनकार किया है.”

इस बीच, “यूरोपीय नौकरशाह यूक्रेनी लोगों को गुमराह करते रहने पर आमादा हैं और रूस के साथ टकराव में उन्हें ‘तोप का चारा’ (cannon fodder) बनाना चाहते हैं.” बयान में आगे कहा गया, “आने वाले वर्षों में ‘यूरोप से दूर होने’ के कारण यूक्रेनियों को निराश होने से बचाने के लिए, ब्रुसेल्स ने जून में उन्हें यूक्रेन के साथ प्री-एक्सेशन (सदस्यता-पूर्व) बातचीत शुरू करने का सुझाव देकर एक लालच दिया. इसके अलावा, कीव को यूरोपीय सुरक्षा नीति में भाग लेने के लिए आमंत्रित करने की भी योजना है, हालांकि उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होगा.”

यूक्रेन फिर क्यों नहीं समझौता कर लेता

SVR के अनुसार, यूक्रेनी राजनयिकों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को असल स्थिति के बारे में बताया है, लेकिन कीव सरकार को पता है कि उसका अस्तित्व पूरी तरह से यूरोप से मिलने वाली आर्थिक और सैन्य मदद पर निर्भर है, इसलिए वह अपने ही लोगों को धोखा देकर यूरोपीय अधिकारियों की बात मान रही है. रूसी खुफिया एजेंसी ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, “असल में, कीव और ब्रसेल्स, दोनों को ही आधुनिक हथियारों और युद्ध के नए तरीकों को आजमाने के लिए यूक्रेनी जमीन की जरूरत है.

रूस का मानना है कि यूरोप के दिवास्वप्न देखने वालों को उम्मीद है कि इससे रूस को ‘रणनीतिक हार’ का सामना कराने में मदद मिल सकती है. हालाकि, ऐसी कल्पनाओं का कोई वास्तविक आधार नहीं है. हमें भरोसा है कि यूक्रेनी लोग आखिरकार जागेंगे और समझेंगे कि उन्हें संकट में किसने धकेला है और उनका भविष्य असल में कहां है?” 

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