
Kark Sankranti 2026: ज्योतिष शास्त्र में ‘जगत की आत्मा’ और ग्रहों के राजा माने जाने वाले सूर्य देव जल्द ही अपना राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं. आगामी 16 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि से निकलकर अपने मित्र चंद्रमा की राशि कर्क में प्रवेश करेंगे. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर के निदेशक, प्रख्यात भविष्यवक्ता और कुंडली विश्लेषक डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, सूर्य का यह गोचर 16 जुलाई की रात्रि 11:38 मिनट पर होगा. सूर्य इस राशि में 17 अगस्त तक रहेंगे, जिसके बाद वे अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश कर जाएंगे.
सूर्य के इस गोचर को ‘कर्क संक्रांति’ के नाम से जाना जाता है. इस दिन से छह महीने के उत्तरायण काल का अंत होता है और ‘दक्षिणायन’ की शुरुआत होती है, जो मकर संक्रांति तक चलती है.
सूर्य संक्रांति पर तीर्थ स्नान, दान और सूर्य उपासना का महत्व
स्कंद और पद्म पुराण के अनुसार, आषाढ़ महीने और संक्रांति के दिन सूर्य देव को जल चढ़ाने व उपासना करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है. वेदों में सूर्य को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है.
- धार्मिक मान्यता: इस पावन पर्व पर तीर्थ-स्नान, दान और उगते हुए सूरज की पूजा करने से बीमारियाँ दूर होती हैं, उम्र बढ़ती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
- ऐतिहासिक संदर्भ: वाल्मीकि रामायण के अनुसार, लंका विजय के लिए प्रस्थान करने से पहले भगवान श्रीराम ने भी सूर्य देव को जल चढ़ाकर उनकी पूजा की थी, जिससे उन्हें रावण पर विजय प्राप्त करने में मदद मिली.
सेहत के नजरिये से सूर्य को जल देने के फायदे
डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि सुबह जल्दी उठकर सूर्य को जल चढ़ाना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है:
विटामिन डी की आपूर्ति: उगते सूर्य की किरणें शरीर को भरपूर मात्रा में विटामिन डी देती हैं और हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट कर निरोगी बनाती हैं.
अंगों की सक्रियता: मानव शरीर पंच तत्वों से बना है, जिसमें अग्नि तत्व के कारक सूर्य हैं. सुबह जल चढ़ाते समय सूर्य की किरणें पूरे शरीर पर पड़ने से हार्ट, स्किन, आंखें, लिवर और दिमाग जैसे अंग सक्रिय हो जाते हैं.
मानसिक लाभ: सूर्य पूजा से इच्छाशक्ति मजबूत होती है, सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है, मन प्रसन्न रहता है और शरीर के ऊर्जा चक्र सक्रिय होते हैं.
देश-दुनिया और मौसम पर कर्क संक्रांति का असर
सूर्य का यह गोचर राजनीति, बिजनेस और मौसम को बड़े स्तर पर प्रभावित करेगा. डॉ. अनीष व्यास के मुताबिक, सूर्य के इस गोचर के प्रभाव से देश भर में महंगाई बढ़ने के आसार हैं. इसके साथ ही देश के कुछ इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है, तो वहीं कुछ हिस्सों में सूखे का सामना करना पड़ सकता है.
सूर्य का गोचर: 4 राशियों के लिए शुभ, 8 के लिए रहेगा भारी
सूर्य का यह राशि परिवर्तन मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा. मित्र राशि में होने के कारण यह कई मायनों में मिलाजुला रहेगा. इस गोचर का सबसे अधिक प्रभाव कर्क राशि पर देखने को मिलेगा.
- इन 4 राशियों के लिए रहेगा शुभ: वृष, कन्या, तुला और कुंभ.
- इन 8 राशियों को रहना होगा सावधान (अशुभ प्रभाव): मेष, मिथुन, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मकर और मीन.
कुंडली में सूर्य की स्थिति का महत्व
जब कुंडली में सूर्य मजबूत हो: अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य मजबूत स्थिति में है, तो उसे हर क्षेत्र में सफलता, सुख-शांति और समृद्धि मिलती है. पिता के साथ संबंध मजबूत होते हैं. ऐसे जातकों को सरकारी नौकरी मिलने के योग बनते हैं, राजनीतिक जीवन में सफलता मिलती है, मान-सम्मान में वृद्धि होती है और वे समाज में उच्च पद प्राप्त करते हैं.
जब कुंडली में सूर्य कमजोर हो: सूर्य के कमजोर या पीड़ित होने पर व्यक्ति को कार्यक्षेत्र और निजी जीवन में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है. जातक को हार्ट और नेत्र से संबंधित बीमारियाँ परेशान करती हैं. झूठे आरोपों का सामना करना पड़ता है, मान-सम्मान में कमी आती है और धन की लगातार हानि होती है. इसके अशुभ प्रभाव से कुंडली में पितृ दोष भी लगता है.
सूर्य के मित्र और शत्रु ग्रह: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य मेष राशि में उच्च के और तुला राशि में नीच के होते हैं. चंद्रमा, मंगल और गुरु सूर्य के मित्र ग्रह हैं; बुध के साथ सम संबंध हैं; जबकि शनि और शुक्र से इनका शत्रुता का संबंध है.
सूर्य के अशुभ प्रभावों से बचने के अचूक उपाय
कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने सूर्य देव की कृपा पाने और अशुभ फलों को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय बताए हैं:
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ: प्रतिदिन भगवान सूर्य की स्तुति के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें.
सूर्य अर्घ्य: रोज सुबह जल्दी उठकर उगते हुए सूर्य देव को जल (अर्घ्य) देना शुरू करें.
पिता का सम्मान: अपने जन्मदाता पिता का सम्मान करें और रोज सुबह उनके चरण छूकर आशीर्वाद लें.
रविवार का व्रत: सूर्य देव की कृपा के लिए रविवार के दिन उपवास रखें.
सेवा और दान: बंदरों, पहाड़ी गाय या कपिला गाय को भोजन कराएं. भगवान श्री विष्णु की नियमित उपासना करें.
नियम: रोजाना घर से बाहर निकलने से पहले थोड़ा सा गुड़ या मिश्री खाकर और पानी पीकर ही निकलें.
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