खबर

JDU का नाम बदलने का प्रस्ताव, अब नीतीश का नाम ही आएगा पार्टी के काम? | Nitish Kumar there’s talk of a name change for JDU



बिहार की राजनीति में JDU के नाम को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद पार्टी के नाम में उनके नाम को जोड़ने का सुझाव सामने आया है. JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने यह सुझाव आगे बढ़ाया है. पार्टी के कुछ बड़े नेताओं ने भी इसका समर्थन किया है. अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इस चर्चा ने बिहार की राजनीति में कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं. 

सबसे बड़ा सवाल यही है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के तुरंत बाद पार्टी के नाम को बदलने की जरूरत क्यों महसूस हुई? पिछले करीब दो दशक में JDU की पहचान काफी हद तक नीतीश कुमार के नाम से ही रही है. 

बिहार में जब JDU का नाम लिया जाता है तो लोगों के दिमाग में सबसे पहले नीतीश कुमार का चेहरा आता है. अब जब वह मुख्यमंत्री नहीं हैं तो पार्टी शायद यह साफ करना चाहती है कि सत्ता की कुर्सी बदलने के बावजूद JDU की पहचान नीतीश कुमार से ही जुड़ी रहेगी.

पार्टी क्या मैसेज देना चाहती है?

संजय झा ने पार्टी का नाम नीतीश कुमार के नाम पर रखने का सुझाव दिया है. इसके पीछे नीतीश के लंबे राजनीतिक सफर और पार्टी के लिए उनके योगदान को वजह बताया जा रहा है. यानी संदेश यह देने की कोशिश है कि JDU की राजनीति में नीतीश की भूमिका अभी खत्म नहीं हुई है. मुख्यमंत्री पद भले ही उनके पास नहीं है, लेकिन पार्टी के सबसे बड़े नेता के तौर पर उनकी जगह बनी हुई है.

लेकिन इसके पीछे सिर्फ सम्मान की राजनीति है, ऐसा मानना भी आसान नहीं है. नाम और पहचान का सीधा संबंध वोट से भी होता है. JDU का अपना एक पुराना वोट बैंक रहा है. पार्टी शायद यह संदेश देना चाहती है कि नेतृत्व में बदलाव के बावजूद उसके पुराने समर्थकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. नीतीश कुमार अब भी पार्टी के साथ हैं और पार्टी की राजनीति उनकी सोच और काम के आसपास ही रहेगी.

JDU के सामने एक और चुनौती है. अब बिहार में मुख्यमंत्री बीजेपी के सम्राट चौधरी हैं और JDU सरकार में सहयोगी दल है. ऐसे में पार्टी के लिए अपनी अलग पहचान बनाए रखना जरूरी है.

अगर पार्टी के नाम में नीतीश कुमार का नाम जुड़ता है तो इससे JDU यह बताने की कोशिश कर सकती है कि NDA में रहते हुए भी उसकी अपनी अलग पहचान है.

नेतृत्व को लेकर होने वाली अंदरूनी खींचतान को भी रोकने की कोशिश

पार्टी के अंदर की राजनीति भी इस चर्चा का एक कारण हो सकती है. पिछले कुछ सालों में JDU में नेतृत्व को लेकर कई बदलाव हुए हैं. अब नीतीश मुख्यमंत्री नहीं हैं. ऐसे समय में पार्टी के नाम में उनका नाम जोड़ने से संगठन के अंदर यह संदेश जा सकता है कि नीतीश ही पार्टी के सबसे बड़े और अंतिम नेता हैं. इससे नेतृत्व को लेकर होने वाली अंदरूनी खींचतान को भी रोकने की कोशिश हो सकती है.

विपक्ष इस पूरे मामले को अलग नजर से देख रहा है. विपक्ष के नेता सवाल उठा रहे हैं कि क्या JDU के अंदर सब कुछ ठीक चल रहा है? क्या पार्टी को भविष्य में नेतृत्व और वोट बैंक को लेकर चिंता है? हालांकि JDU की तरफ से ऐसी किसी परेशानी की बात नहीं कही गई है. पार्टी नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार का योगदान बहुत बड़ा है और उनके नाम को पार्टी से जोड़ना सम्मान की बात है.

यह चर्चा ऐसे समय में भी सामने आई है जब नीतीश कुमार के जन्मस्थान बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ करने की मांग उठी थी. JDU ने इस मांग से दूरी बना ली थी. अब पार्टी के नाम में नीतीश का नाम जोड़ने की बात ने इस पूरे मामले को और दिलचस्प बना दिया है. 

आने वाले दिनों में इसका जवाब साफ हो सकता है. फिलहाल इतना जरूर है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटने के बाद भी नीतीश कुमार JDU की राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं. अब देखना होगा कि पार्टी उनके नाम को सिर्फ अपनी पहचान बनाए रखती है या सच में अपने नाम का हिस्सा बना देती है.

यह भी पढ़ें: बिहार MLC चुनाव: राजद ने 6 उम्मीदवारों का किया ऐलान, 2 सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ीं




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button