
Dhanteras 2026: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला धनतेरस का पावन पर्व वास्तव में पांच दिवसीय दीपोत्सव का सूचक है. इस दिन खरीदारी और संध्या कालीन पूजा का विशेष महत्व माना गया है.
दीपावली महापर्व की शुरुआत धनतेरस (धन त्रयोदशी) से होती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. इसी कारण इस दिन को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी जाना जाता है. धनतेरस के दिन की गई खरीदारी अत्यंत शुभ और अक्षय फलदायी मानी जाती है. इसी रात से यमराज और मां लक्ष्मी के स्वागत में दीये जलाने का क्रम भी प्रारंभ होता है.
धनतेरस पर किनकी पूजा की जाती है?
भगवान धन्वंतरि: देवताओं और दानवों के समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश के साथ कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि का अवतरण हुआ था. शारीरिक आरोग्य, निरोगी काया और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए इस दिन विशेष रूप से धन्वंतरि देव की पूजा की जाती है.
भगवान कुबेर: कुबेर देव को देवताओं का कोषाध्यक्ष माना गया है, जो समस्त धन-संपदा के संरक्षक और संचालक हैं. धन में स्थिरता बनी रहे और आम इंसान की उन्नति व आर्थिक समझ बेहतर हो, इसके लिए मां लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान कुबेर की अर्चना की जाती है. दोनों एक-दूसरे के पूरक माने जाते हैं.
मां लक्ष्मी: सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी भी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं. इसी कारण धनतेरस की संध्या पर मां लक्ष्मी के स्वागत और आशीर्वाद के लिए घर के मुख्य द्वार व आंगन में दीप जलाए जाते हैं.
धनतेरस पर ग्रहों की स्थिति
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष धनतेरस पर ग्रहों का बेहद अनुकूल और दुर्लभ संयोग बन रहा है:
विशेष दिन: यह पर्व शुक्रवार को पड़ रहा है, जो मां लक्ष्मी और धन-ऐश्वर्य के स्वामी ग्रह शुक्र को समर्पित विशेष दिन है.
तिथि योग: द्वादशी तिथि सुबह 11:06 बजे तक रहेगी, जिसके उपरांत त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी. द्वादशी मांगलिक कार्यों व दान-पुण्य के लिए शुभ मानी जाती है.
नक्षत्र व योग: हस्त नक्षत्र के प्रभाव से धन वृद्धि और दैनिक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. यद्यपि विष्कुम्भ योग की पहली घटी सामान्य कार्यों के लिए मध्यम मानी जाती है, परंतु धीरे-धीरे सभी कार्य सिद्ध होते हैं.
ग्रह गोचर स्थिति: सूर्य तुला राशि में, चंद्रमा कन्या राशि में, मंगल कर्क राशि में, बुध तुला राशि में, गुरु सिंह राशि में, शुक्र कन्या राशि में, शनि मीन राशि में, राहु कुंभ राशि में तथा केतु सिंह राशि में संचरण करेंगे.
(नोट: धनतेरस की पूजा में राहुकाल और चौघड़िया का विचार अनिवार्य नहीं माना जाता है.)
धनतेरस 2026: पूजा और खरीदारी के शुभ मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 06 नवंबर 2026 (शुक्रवार), सुबह 11:06 बजे से
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 07 नवंबर 2026 (शनिवार), सुबह 10:46 बजे तक
हस्त नक्षत्र प्रारंभ: 06 नवंबर 2026 (शुक्रवार), सुबह 05:43 बजे से
हस्त नक्षत्र समाप्त: 07 नवंबर 2026 (शनिवार), सुबह 07:20 बजे तक
प्रदोष काल: 06 नवंबर 2026 (शुक्रवार), शाम 05:30 बजे से 07:00 बजे तक
धनतेरस पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: 06 नवंबर 2026 (शुक्रवार), शाम 05:30 बजे से 07:00 बजे तक
वृषभ लग्न (स्थिर लग्न): 06 नवंबर 2026 (शुक्रवार), शाम 05:45 बजे से 07:42 बजे तक
धनतेरस पूजा के शास्त्रीय नियम
शास्त्रों के अनुसार, धनतेरस की पूजा संध्या काल यानी प्रदोष काल में करना सर्वोत्तम माना गया है. इसके साथ ही स्थिर लग्न (विशेषकर वृषभ लग्न) का समय अत्यंत फलदायी होता है.
प्रदोष काल और वृषभ लग्न के संयोग में भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन कुबेर की विधिवत पूजा-अर्चना करने से घर और व्यापार में लक्ष्मी का स्थायी वास होता है तथा धन-संपत्ति में निरंतर बरकत बनी रहती है.
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