धर्म

Ashadha Gupt Navratri 2026 : मां काली की उपासना बदल देगी आपकी किस्मत, जानें सही विधि


Ashadha Gupt Navratri 2026 : हिंदू धर्म में 15 जुलाई 2026 से गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है. यह पर्व शक्ति साधना, तंत्र-मंत्र और देवी उपासना के लिए विशेष महत्व रखता है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में विशेष रूप से मां काली, मां तारा, मां छिन्नमस्ता, मां धूमावती और अन्य महाविद्याओं की पूजा-अर्चना की जाती है. माना जाता है कि इन नौ दिनों में श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई साधना से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और साधक को आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है.

मां काली का क्यों है विशेष महत्व?

हिंदू धर्म में मां काली को आदिशक्ति का उग्र और कल्याणकारी स्वरूप माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि मां काली की सच्चे मन से की गई उपासना व्यक्ति के जीवन से भय, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अशांति को दूर करने में सहायक होती है. यही वजह है कि शक्ति साधना में मां काली का विशेष स्थान बताया गया है.

मां काली की पूजा से क्या मिलते हैं लाभ?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त नियमपूर्वक मां काली का ध्यान, मंत्र जाप और पूजा करते हैं, उन्हें आत्मबल, साहस और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है. विशेष रूप से गुप्त नवरात्रि, अमावस्या, शुक्रवार और शक्ति पूजा के अवसरों पर मां काली की आराधना को अत्यंत शुभ माना जाता है.

पूजा में क्या अर्पित करें?

पूजा के दौरान माता को लाल या गुड़हल के फूल, दीपक, धूप और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित किया जाता है. मान्यता है कि श्रद्धा और संयम के साथ की गई आराधना से मां काली अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं.

धर्मग्रंथों में क्या बताया गया है?

धर्मग्रंथों में मां काली का स्वरूप केवल संहार का नहीं, बल्कि अधर्म, अहंकार और बुराइयों के अंत का भी प्रतीक माना गया है. उनका संदेश है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति अंततः विजय प्राप्त करता है.

मां काली की पूजा करते समय रखें इन बातों का ध्यान

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, मां काली की उपासना केवल मनोकामनाएं पूरी करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मिक उन्नति, मन की शांति और आत्मविश्वास बढ़ाने का भी मार्ग मानी जाती है. इसलिए भक्तों को हमेशा श्रद्धा, सात्विकता और विधि-विधान के साथ माता की आराधना करनी चाहिए. साथ ही, पूजा के दौरान क्रोध, असत्य और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की भी सलाह दी जाती है.

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