
Anant Chaturdashi 2026: आज 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी है. अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा के बाद 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा है. इसे केवल साधारण धागा नहीं, बल्कि अनंत भगवान के प्रति श्रद्धा, संकल्प और व्रत का प्रतीक माना जाता है. अगर यह सूत्र कुछ दिन बाद अपने आप खुल जाए या अचानक टूट जाए, तो क्या इससे क्या समझें ? क्या उसी धागे को जोड़कर फिर बांध सकते हैं या नया अनंत सूत्र धारण करना चाहिए?
अनंत सूत्र टूटना क्या अपशकुन
अनंत सूत्र का अपने आप टूट जाना किसी निश्चित अनहोनी या भविष्य में होने वाली घटना का शास्त्रीय संकेत है. धागा लगातार हाथ में रहने के कारण पानी, पसीने, कपड़ों में उलझने या रोजमर्रा के काम से कमजोर होकर टूट सकता है इसलिए केवल सूत्र टूट जाने से डरे नहीं.
धार्मिक परंपरा में पूजा के बाद धारण किए गए सूत्र के प्रति सम्मान बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में टूटे हुए धागे को जमीन पर फेंकने या सामान्य कूड़े में डालने के बजाय श्रद्धापूर्वक अलग रख दें.
क्या टूटे हुए अनंत सूत्र को दोबारा बांधें?
बांधने के बाद अनंत सूत्र टूट जाए तो धागे को जोड़कर दोबारा बांधना सामान्य धार्मिक परंपरा में उचित नहीं माना जाता. टूटे हुए धागे को आदरपूर्वक किसी पवित्र नदी के जल में प्रवाहित कर देना चाहिए. यदि आसपास कोई नदी न हो, तो उसे पीपल के वृक्ष की जड़ में दबा देना चाहिए.
अगर सूत्र अनंत चतुर्दशी के दिन ही पूजा के तुरंत बाद टूट जाए तो डरने की बात नहीं है. विष्णु जी से क्षमा याचना करें और उसे श्रीहरि के चरणों में रख दें. बाद में इसे नदी में विसर्जित कर दें. सूत्र टूटने या खोने पर भगवान श्रीहरि से भूल की तुरंत क्षमा मांगें.
अनंत सूत्र सूती या रेशमी कौन सा होना चाहिए
अनंत सूत्र के रेशमी और सूती दोनों हो सकते हैं. महत्वपूर्ण ये है कि अनंत सूत्र बांधने से पहले इसकी विधिवत पूजा करें और बांधने के बाद नियम का पालन करें. 14 गांठ लगाना जरुरी है.
- सूत्र में 14 गांठें होनी चाहिए. इन्हें परंपरा में 14 लोकों से जोड़ा जाता है.
- सूत्र को पहले अनंत देव (विष्णु जी) की पूजा में रखकर पूजित किया जाता है.
- पूजा के बाद इसे बांह पर धारण किया जाता है. दाहिने हाथ में अनंत सूत्र बांधने का उल्लेख है.
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