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AMU में जीतने वाले मोहम्मद नोमान अशरफ, नशरा नईम और मोहम्मद हमदान कौन हैं? छात्रों से किए वादे | AMU student union winners Mohammad Noman Ashraf Nasra Naeem Mohammad Hamdan profile


अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में आठ साल बाद हुए छात्रसंघ चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं. अध्यक्ष पद पर मोहम्मद नोमान अशरफ, उपाध्यक्ष पद पर नशरा नईम और सचिव पद पर मोहम्मद हमदान ने जीत दर्ज की है. चुनाव के नतीजों के साथ ही विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में नए चेहरों की एंट्री हो गई है. इस बार चुनाव में क्षेत्रीय लॉबी, छात्र समूहों और उम्मीदवारों की अपनी पहचान की काफी चर्चा रही. वहीं नसरा नईम की जीत ने छात्रसंघ के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड बना दिया है.

क्षेत्रीय लॉबी के बीच था मुकाबला

चुनाव से पहले ही AMU कैंपस में अलग-अलग क्षेत्रों के छात्र समूहों के बीच समर्थन को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी. अध्यक्ष पद पर बिहार और पश्चिमी यूपी के छात्र समूहों के बीच मुकाबले की बात कही जा रही थी. वहीं उपाध्यक्ष और सचिव पद पर पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के छात्र समूहों के समीकरण की चर्चा थी. अध्यक्ष पद पर बिहार के प्रत्याशी को पूर्वी यूपी के छात्रों का समर्थन मिलने की बात सामने आई थी. दूसरी तरफ पश्चिमी यूपी के छात्र भी दूसरे क्षेत्रों के वोटरों को अपने साथ जोड़ने में लगे थे. इस बार किसी राजनीतिक पार्टी का अधिकृत पैनल नहीं था. ऐसे में चुनाव को छात्र समूहों के समर्थन और क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा था.

अब नतीजे आने के बाद इन समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है. अध्यक्ष पद पर नोमान अशरफ की बड़ी जीत हुई, जबकि उपाध्यक्ष पद पर नसरा नईम और सचिव पद पर मोहम्मद हमदान ने बाजी मारी. हालांकि, सिर्फ वोटों के आंकड़ों से यह तय नहीं किया जा सकता कि किस क्षेत्र की लॉबी ने किस उम्मीदवार को जीत दिलाई.

कौन हैं नए अध्यक्ष मोहम्मद नोमान अशरफ?

मोहम्मद नोमान अशरफ AMU के इतिहास विभाग में पीएचडी के तीसरे साल के रिसर्चर हैं. चुनाव प्रचार के दौरान उनकी चर्चा उनके भाषण और छात्रों के मुद्दों पर रखे गए विचारों को लेकर भी हुई. नोमान ने अपने चुनाव में 21 पन्नों का मैनिफेस्टो जारी किया था. इसमें रिसर्च स्कॉलर की फेलोशिप, छात्रों की सुविधाएं, महिला सुरक्षा, प्लेसमेंट और विश्वविद्यालय के दूसरे सेंटरों के छात्रों को प्रतिनिधित्व देने जैसे मुद्दे शामिल थे. 

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अपने आखिरी भाषण में उन्होंने कैंपस की समस्याओं के साथ गाजा-फिलिस्तीन और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का भी जिक्र किया था. अध्यक्ष पद के चुनाव में नोमान अशरफ को 7797 वोट मिले, जबकि दूसरे नंबर पर रहे मोहम्मद इंतखाब को 3676 वोट मिले. इस तरह नोमान ने 4121 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की.

कौन हैं पहली महिला उपाध्यक्ष नशरा नईम?

इस चुनाव की सबसे खास बात नशरा नईम की जीत रही. वह AMU छात्रसंघ के इतिहास में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव जैसे तीन प्रमुख पदों में से किसी एक पर जीत दर्ज करने वाली पहली महिला बनी हैं. नशरा लॉ फैकल्टी की BA-LLB की छात्रा हैं. चुनाव के दौरान उन्होंने छात्राओं की भागीदारी और छात्र हितों को लेकर अपनी बात रखी थी. उनकी जीत को कैंपस की छात्र राजनीति में महिलाओं के लिए एक अहम बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.

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उपाध्यक्ष पद पर नशरा को 7091 वोट मिले. उन्होंने साकिब अली खान को हराया, जिन्हें 5818 वोट मिले. जीत के बाद नशरा ने इसे तलबा बिरादरी की जीत बताया. उन्होंने कहा कि एक विजन के साथ उन्होंने नई लकीर खींची है और उम्मीद है कि आगे भी ये सिलसिला जारी रहेगा.

कौन हैं नए सचिव मोहम्मद हमदान?

सचिव पद पर मोहम्मद हमदान ने जीत दर्ज की है. वह AMU में बीटेक के छात्र हैं. चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने पांच पन्नों का मैनिफेस्टो जारी किया था. इसमें छात्राओं की सुरक्षा, हॉस्टल की समस्याएं, पढ़ाई, प्लेसमेंट, विश्वविद्यालय की विरासत और छात्रों को कानूनी मदद जैसे मुद्दे शामिल थे. हमदान ने अपने मैनिफेस्टो में छात्रसंघ को प्रशासन के सामने छात्रों की आवाज उठाने वाला मजबूत मंच बताया था. सचिव पद पर मोहम्मद हमदान को 8385 वोट मिले, जबकि अहमद फराज राजी 6882 वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहे. मोहम्मद हमदान को तीनों प्रमुख पदों पर सबसे ज्यादा वोट मिले हैं.

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आठ साल बाद बदली छात्र राजनीति की तस्वीर

AMU में पिछला छात्रसंघ चुनाव 2018-19 में हुआ था. इसके बाद लंबे समय तक चुनाव नहीं हो सके. छात्र लगातार यूनियन की बहाली और चुनाव कराने की मांग कर रहे थे. इसी साल छात्र यासिर फहाद ने चुनाव कराने की मांग को लेकर 19 दिन तक भूख हड़ताल की थी. इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव कराने का फैसला लिया.

इस बार छात्रसंघ और विमेंस कॉलेज यूनियन के चुनाव में करीब 26,500 छात्र-छात्राएं मतदाता थे. लंबे अंतराल के बाद हुए चुनाव में छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. मतगणना के दौरान भी कैंपस में छात्रों की भीड़ लगी रही. नतीजे सामने आते ही समर्थकों ने नारेबाजी और आतिशबाजी कर जीत का जश्न मनाया.

अब नए छात्रसंघ के सामने होंगी ये चुनौतियां

आठ साल बाद चुने गए नए छात्रसंघ के सामने अब छात्रों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी. हॉस्टल की व्यवस्था, पढ़ाई, प्लेसमेंट, छात्राओं की सुरक्षा, रिसर्च स्कॉलर की समस्याएं और कैंपस की दूसरी सुविधाएं नए पदाधिकारियों के लिए अहम मुद्दे होंगे.

इस चुनाव ने एक तरफ नए छात्र नेतृत्व को सामने लाया है, तो दूसरी तरफ क्षेत्रीय छात्र समूहों की भूमिका पर भी चर्चा शुरू कर दी है. अब देखना होगा कि नए पदाधिकारी चुनाव के दौरान किए गए वादों को कितना पूरा कर पाते हैं और AMU की छात्र राजनीति को किस दिशा में लेकर जाते हैं.

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