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Aaj ka Panchang 29 October 2026: करवा चौथ का व्रत आज, नोट करें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूरा पंचांग | Aaj ka Panchang 29 October 2026 tithi shubh muhurat rahukal nakshatra yog guruwar ka panchang karwa chauth



Aaj ka Panchang 29 October 2026: हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है. कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है. पंचांग हिंदू काल-गणना की एक पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है.

आज की तिथि: करवा चौथ आज

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि गुरुवार को रात 1:07 बजे से शुरू होकर रात 10:10 बजे तक रहेगी. इस दिन करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा. इसके बाद कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी, जो 30 अक्टूबर की रात 7:25 बजे तक रहेगी. गुरुवार को सुबह 6:34 बजे सूर्योदय और शाम 5:46 बजे सूर्यास्त होगा. वहीं, रात 8:33 बजे चंद्रोदय और अगले दिन सुबह 10:52 बजे चंद्रास्त होगा.

नक्षत्र

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में रहेंगे. ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करते हैं या इस नक्षत्र में स्थित होते हैं, तो इसके विशेष और गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं. स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव (वायु) हैं और स्वामी राहु हैं. इस नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश से लोगों में पुरानी परिस्थितियों और बंधनों से निकलकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की भावना प्रबल होती है.

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योग

गुरुवार रात 12:05 बजे तक परिघ योग रहेगा. इसके बाद शिव योग शुरू हो जाएगा. ज्योतिष के अनुसार, परिघ योग पंचांग के 27 नित्य योगों में से 19वां योग है. इसका शाब्दिक अर्थ ‘बाधा’, ‘रुकावट’ या ‘दरवाजा बंद करने वाली लोहे की छड़ / डंडा’ होता है. इस योग के अधिष्ठाता देवता भगवान विश्वकर्मा (त्वष्टा) हैं और इसके संचालक ग्रह शनि देव माने जाते हैं. मुहूर्त शास्त्र में परिघ योग को सामान्यतः एक अशुभ या बाधाकारक योग माना जाता है.

आज का शुभ मुहूर्त

इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा. यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है. आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवाँ मुहूर्त) होता है. माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं. जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर होते हैं, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है.

गुरुवार को सुबह 8:17 बजे से 9:44 बजे तक अमृतकाल रहेगा. ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है. इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है. इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है. यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है.

नोट करें राहुकाल

इस दिन राहुकाल दोपहर 1:34 बजे से 2:58 बजे तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है. स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है. इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है.

गुरुवार को यमगंड काल सुबह 6:34 बजे से 7:58 बजे तक रहेगा. यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है. इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए. इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेन-देन से बचना चाहिए.

इस दिन गुलिक काल सुबह 9:22 बजे से दोपहर 10:46 बजे तक रहेगा. गुलिक काल को ‘विषैला समय’ भी कहा जाता है. यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है. माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं. इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है. जो काम बार-बार करने हों, वे इस काल में किए जा सकते हैं. बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है.

ग्रहों की स्थिति

गुरुवार को सूर्य तुला राशि में रहेंगे. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य जब तुला राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे सूर्य का नीच होना या नीचस्थ होना कहा जाता है. सूर्य अग्नि तत्व का कारक है, जबकि तुला राशि वायु तत्व और शुक्र ग्रह के अधीन आती है, जो सूर्य के स्वभाव के विपरीत है. सूर्य को अहंकार, आत्मविश्वास और नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है. तुला राशि में आने से आत्मबल या ऊर्जा थोड़ी कमजोर महसूस हो सकती है. इस स्थिति में किसी भी फैसले पर पहुंचना मुश्किल हो सकता है.

इस दिन चंद्र देव वृषभ राशि में रहेंगे; पूरे दिन और रात चंद्रमा वृषभ राशि में संचार करेंगे. ज्योतिष के अनुसार, वृषभ राशि में चंद्रमा का होना उच्च और अत्यंत शुभ माना जाता है. वृषभ राशि के स्वामी शुक्र हैं. चंद्रमा मन और भावनाओं के कारक हैं. वृषभ में होने से मन शांत, स्थिर और संयमित रहता है. भावनाओं में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव से राहत मिलती है.

दिशाशूल

गुरुवार को दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है.

(IANS की रिपोर्ट)

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