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अमेरिकन लोकगीत से प्रेरित कुमार सानू का वो गाना, हर प्रेमी की प्लेलिस्ट में शामिल, 35 साल बाद सुनाकर प्रेमानंद महाराज का भी जीता दिल | kumar sanu this 35 year old superhit song won premanand maharaj heart favorite of every lover inspired by american folk song



प्रेमानंद महाराज के वृंदावन स्थित आश्रम में देश-दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. आम लोगों के साथ-साथ फिल्म और खेल जगत की कई मशहूर हस्तियां भी समय-समय पर उनका आशीर्वाद लेने आती रही हैं. विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के बाद अब दिग्गज पार्श्व गायक कुमार सानू का एक पुराना वीडियो फिर से सोशल मीडिया पर चर्चा में है. इस वीडियो में कुमार सानू महाराज के सामने अपनी आवाज का जादू बिखेरते नजर आते हैं. यह वीडियो एक बार फिर ट्रेंड करने लगा है.

प्रेमानंद महाराज के सामने गाया अपना सदाबहार सुपरहिट गीत

आश्रम में पहुंचने पर एक शिष्य ने कुमार सानू का परिचय देते हुए बताया कि उन्होंने अपने लंबे करियर में 27 हजार से अधिक गाने रिकॉर्ड किए हैं. इसके बाद कुमार सानू ने बेहद विनम्र अंदाज में प्रेमानंद महाराज के सामने फिल्म जुर्म का मशहूर गीत ‘जब कोई बात बिगड़ जाए’ सुनाया. गाना खत्म होने के बाद उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि वह केवल महाराज का आशीर्वाद लेने आए हैं ताकि वह आगे भी अपने काम को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करते रहें. प्रेमानंद महाराज भी पूरे समय ध्यान से उनकी प्रस्तुति सुनते दिखाई दिए. यह भावुक पल अब सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है.

35 साल बाद भी फीका नहीं पड़ा इस गाने का जादू

साल 1990 में रिलीज हुई फिल्म जुर्म का यह रोमांटिक गीत आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा गानों में गिना जाता है. माना जाता है कि इसकी धुन अमेरिकी लोकगीत ‘500 Miles’ से प्रेरित थी, लेकिन भारतीय संगीत और बोलों ने इसे अपनी अलग पहचान दिलाई. गीत को कुमार सानू और साधना सरगम ने अपनी मधुर आवाज दी थी, जबकि इसके बोल प्रसिद्ध गीतकार इंदीवर ने लिखे थे. संगीतकार राजेश रोशन ने इसकी धुन तैयार की, जिसने इसे हमेशा के लिए यादगार बना दिया.

महेश भट्ट के निर्देशन में बनी फिल्म जुर्म में यह गीत विनोद खन्ना और मीनाक्षी शेषाद्री पर फिल्माया गया था. दोनों कलाकारों की शानदार केमिस्ट्री ने इस रोमांटिक ट्रैक को और भी खास बना दिया. रिलीज के तीन दशक से ज्यादा समय बाद भी यह गाना प्यार, भरोसे और साथ निभाने का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि आज भी यह गाना पुराने संगीत प्रेमियों के साथ-साथ नई पीढ़ी की प्लेलिस्ट में भी अपनी जगह बनाए हुए है. प्रेमानंद महाराज के सामने कुमार सानू द्वारा इसी अमर गीत को गाना उनके प्रशंसकों के लिए किसी खास तोहफे से कम नहीं रहा.

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