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डॉक्टरों को पीटने वाला शिवसेना पार्षद निकला हिस्ट्रीशीटर, 18 केस दर्ज, डरे डॉक्टर ने दिया इस्तीफा | Thane Doctor Assault Case Shiv Sena Corporator Ramesh Mhatre Has 18 Criminal Cases Victim Doctor Resigns



महाराष्ट्र के ठाणे जिले के एक नगर निगम अस्पताल में शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के पार्षद रमेश म्हात्रे द्वारा मारपीट का शिकार हुए डॉक्टर मामले में कई खुलासे हुए हैं. डॉक्टरों के साथ मारपीट करने वाले चारों आरोपी पुलिस रिकॉर्ड के आदतन हिस्ट्रीशीटर अपराधी हैं. इस मामले में पीड़ित डॉक्टरों में से एक ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है. डॉक्टर का कहना है कि उन्हें अपनी सुरक्षा का डर है और उन्होंने हमेशा के लिए शहर छोड़ दिया है.

आरोपियों पर पहले से दर्ज हैं मामले

जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी कॉरपोरेटर रमेश म्हात्रे के नाम पर कुल 18 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. आरोपी अक्षय कारंडे पर हत्या के प्रयास के दो और मारपीट का एक मामला दर्ज है. आरोपी प्रमोद निकम पर सातारा जिले में हत्या का मामला दर्ज है. आरोपी रमेश पवार पर महिलाओं से छेड़छाड़ के मामले दर्ज हैं.

रमेश म्हात्रे का पुराना वीडियो वायरल

रमेश म्हात्रे के केडीएमसी मुख्यालय में हंगामे का पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है.  इस वीडियो के संदर्भ में यह दावा किया जा रहा है कि साल 2017 में जब पी. वेलारासु केडीएमसी के आयुक्त थे, तब रमेश म्हात्रे ने उनके केबिन में जबरन घुसने का प्रयास किया था. बताया जा रहा है कि उस समय आयुक्त के केबिन में भारी हंगामा हुआ था. इस घटना को लेकर उस वक्त कल्याण के बाजारपेठ पुलिस स्टेशन में रमेश म्हात्रे सहित कुछ अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी.

एक डॉक्टर ने दिया इस्तीफा

मारपीट के शिकार हुए एक डॉक्टर ने इस्तीफा दे दिया है. एनडीटीवी से बातचीत में डॉक्टर ने कहा कि इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर दिया है और अब वह अस्पताल में काम करने के लिए खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते. डॉक्टर ने कहा, “मैंने इस्तीफा इसलिए दिया क्योंकि मुझे बहुत डर लग रहा है. गुंडे हमारी निगरानी कर रहे हैं और मैं शहर छोड़ चुका हूं. वे बहुत खतरनाक लोग हैं. दूसरे डॉक्टर वहां काम जारी रख सकते हैं, लेकिन मैं नहीं. मैं दोबारा वहां कभी नहीं जाऊंगा.”

यह घटना 6 जुलाई को डोंबिवली स्थित कल्याण-डोंबिवली नगर निगम द्वारा संचालित शास्त्री नगर अस्पताल में हुई थी. अस्पताल प्रशासन के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब एक पुरुष और एक महिला डॉक्टर ने नवजात शिशु के परिजनों को सलाह दी कि अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) पूरी तरह भरी हुई है, इसलिए बेहतर इलाज के लिए बच्चे को किसी दूसरे अस्पताल में ले जाना जरूरी है. डॉक्टरों की इस सलाह के बाद परिजनों ने स्थानीय शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे से संपर्क किया. इसके बाद वह अपने कई समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे और मारपीट की.

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