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बेटा जिंदा है भी या नहीं? सतलुज रिलीज होने के बाद वायरल हुआ जसवंत सिंह खालरा का ओरिजनल VIDEO | Diljit Dosanjh Film Sutlej on Human Rights Activist Jaswant Singh Khalra Old Video



नई दिल्ली:

Sutlej Film: लंबे समय से सेंसर बोर्ड की मंजूरी का इंतजार कर रही दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘पंजाब 95’ अब ‘सतलुज’ नाम से OTT पर रिलीज हो गई है. सतलुज रिलीज होने के बाद जसवंत सिंह खालरा का नाम अचानक चर्चा में आ गया है. जसवंत सिंह खालरा पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता थे, जिन्होंने 1990 के दशक में पंजाब में हुई सैकड़ों मौतों के बारे में बड़ा खुलासा किया था. बाद में जसवंत सिंह खालरा की संदिग्ध स्थिति में मौत हो गई थी. जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी, उनकी पड़ताल, सिस्टम से उनकी लड़ाई और 90 के दशक में पंजाब में फैले आतंकवाद के बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म को काफी सराहा जा रहा है. इस फिल्म की चर्चा के बीच जसवंत सिंह खालरा एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. 

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे जसवंत सिंह खालरा का यह वीडियो पुराना है, जिसमें वो किसी मंच से स्पीच देते दिख रहे हैं. अपने भावुक स्पीच में खालरा पंजाब की स्थिति के बारे में बता रहे हैं.

हमारा बेटे जिंदा है भी या नहीं… खालरा ने बताया था माताओं का दर्द

सामने आए खालरा के पुराने वीडियो में वो यह कह रहे हैं कि- हमें कोई जवाब नहीं दे रहा है. हमारा सवाल यह है कि हजारों माएं अपने बेटे को ढूंढ रही हैं.  जमाना जानता है कि उनके बेटों को नहीं छोड़ा गया. लेकिन माओं का दिल तो जानते ही हैं वो बेटे की लाश को देखकर भी यह विश्वास नहीं करती कि उनके बेटों की मौत हो चुकी है. जिन माओं ने अपने बेटों की लाश भी नहीं देखी, वो हमसे सवाल पूछ रही है कि हमें इतना तो बता दो कि हमारे बेटे जिंदा है भी या नहीं. 

3 श्मशानों की पड़ताल कर कई लावारिस मौत का सच लाया था सामने

जसवंत सिंह खालरा पेशे से अमृतसर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़े थे, लेकिन समाज में हो रही कथित ज्यादतियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भी जाने जाते थे. एक परिचित के अचानक लापता होने के बाद उन्होंने इस मामले की पड़ताल शुरू की. जांच के दौरान उन्होंने तीन श्मशानों में हो रहे दाह-संस्कारों की लंबी पड़ताल की. जिसमें उन्होंने पक्के सबूत के साथ यह सच्चाई जुटाई कि पुलिस कई लोगों का अंतिम संस्कार लावारिस बताकर कर रही है.

फिल्म सतलुज से चर्चा में आई खालरा की कहानी

उन्होंने अपनी जांच पर प्रेस नोट जारी किया. कई दस्तावेज भी सामने रखे. लेकिन बाद में वो अचानक लापता हो गए. तब कहा गया कि पुलिसकर्मी उन्हें अपने साथ ले गए थे. बाद में यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना और मानवाधिकार संगठनों ने भी इसकी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई. अब खालरा पर आई इस फिल्म सतलुज ने उस समय की कहानी को फिर से चर्चा में ला दिया है. 

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