
झारखंड में 26000 शिक्षकों के नियुक्ति प्रक्रिया के तहत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार (29 जून) को 1000 से अधिक शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिया. नियुक्ति पत्र देने का कार्यक्रम रांची के टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित हुआ. इस दौरान सीएम हेमंत सोरेन ने शिक्षकों से झारखंड में दूरस्थ इलाकों में शिक्षा और जागरूकता का संदेश पहुंचाने की अपील की. नियुक्ति पत्र पाते ही कार्यक्रम में मौजूद बहुत सारे शिक्षकों के चेहरे खिल आए. किसी ने अपने रिजल्ट के दिन की यादें साझां की तो कोई मुख्यमंत्री के कामों की तारीफ करता नजर आया.
नियुक्ति पत्र मिला, पर चेहरे पर गम
पर 1000 से अधिक शिक्षकों की भीड़ में कुछ ऐसे लोगों को भी नियुक्ति पत्र मिला. जिनके चेहरे पर नियुक्ति पत्र पाने की खुशी से ज्यादा गम साफ दिखाई दिया. नियुक्त पत्र पाने के बावजूद शिक्षकों के चेहरे पर गम नजर आने के पीछे की सबसे बड़ी वजह नियुक्ति पत्र प्रक्रिया में देरी रही. कई शिक्षक रहे जो सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र तो पा गए, पर वह खुश नहीं हुए, क्योंकि किसी के रिटायरमेंट में चंद दिन बचे हैं तो किसी का कुछ ही घंटे बाद रिटायरमेंट है.
रिटायरमेंट के बाद नियुक्ति पत्र
एक शिक्षक ऐसा भी रहा है, जिसको सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र मिला जरूर, पर उसकी उम्र एक महीने पहले पूरी हो चुकी है. मतलब उसका रिटायरमेंट एक महीने पहले ही हो गया. पलामू जिले के नियूम अंसारी को भी उन 1042 शिक्षकों के साथ नियुक्ति पत्र मिला है. पर एक महीने पहले यानी 31 मई 2026 को 60 साल हो गए.

मतलब उनका उम्र के लिहाज से एक महीने पहले ही रिटायरमेंट हो चुका है. अब वह न तो विद्यालय में पढ़ा सकते हैं, न ही उनको नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद वेतन मिलने वाला है, क्योंकि उन्हें भले ही 29 जून को नियुक्ति पत्र मिला है. पर उनकी सेवा 31 मई को ही समाप्त हो गई. पलामू के शिक्षक नियूम अंसारी ने सरकार से ऐसी मांग की है कि ऐसा समाधान हो, जिससे उनकी मेहनत और चयन बेकार न जाए.
सरकारी शिक्षक बनने के अगले दिन रिटायर
इसी तरह एक और शिक्षक की कहानी सामने आई है, जो नियुक्ति पत्र मिलने के अगले ही रिटायर होने वाला मिला. जामताड़ा से नंदलाल रवानी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से 29 जून को नियुक्ति पत्र लिए, पर वह 30 जून यानी मंगलवार को 60 साल के हो गए. मतलब उनका भी रिटायरमेंट आ गया. नंदलाल रवानी का कहना है कि उन्होंने साल 2016 में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) पास की थी.
इसके बाद वह लंबे समय तक नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार करते रहे. साल 2023 में जाकर सहायक आचार्य की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के चलते नियुक्ति में देरी की वजह से आज स्थिति ऐसी रही कि नियुक्ति पत्र मिलने के अगले ही वह रिटायर हो गए.
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