खबर

कई सालों बाद हुए दुर्लभ दर्शन, त्र्यंबकेश्वर के 65 फीट गहरे अमृतकुंड में दिखा प्राचीन शिवलिंग, देखें वीडियो | HISTORIC SHIVLING VISIBLE IN TRIMBAKESHWAR’S AMRUTKUND AFTER YEARS watch video



प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में से एक, श्री त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर से एक बेहद अद्भुत और ऐतिहासिक खबर सामने आई है. कई सालों बाद श्री त्र्यंबकेश्वर महादेव मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक अमृतकुंड के तल में एक शिवलिंग के दर्शन हुए. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ASI द्वारा संरक्षण कार्य के तहत अमृतकुंड का पानी निकालकर उसकी सफाई की गई. सफाई के दौरान कुंड के तल में मौजूद शिवलिंग स्पष्ट रूप से दिखाई दिया. इसके बाद श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन में भारी उत्साह है.

सफाई के दौरान दिखा दुलर्भ नजारा

शिवलिंग का यह दुर्लभ नजारा तब सामने आया जब ASI यानी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षण कार्य के तहत अमृतकुंड के पानी को बाहर निकालकर उसकी गहन सफाई की जा रही थी. जैसे ही कुंड का पानी पूरी तरह खाली हुआ, उसके तल में मौजूद प्राचीन शिवलिंग पूरी तरह से स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा.

देखिए वीडियो

65 फीट गहरा ‘अमृतकुंड’

65 फीट गहरा यह अमृतकुंड पेशवा कालीन माना जाता है. इस कुंड का धार्मिक महत्व अत्यधिक है क्योंकि इसी अमृतकुंड के पवित्र जल का उपयोग श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की नियमित पूजा और अभिषेक के लिए किया जाता है.

अमृतकुंड में प्रवेश प्रतिबंधित

सुरक्षा कारणों को देखते हुए आम श्रद्धालुओं को अमृतकुंड में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है. सुरक्षा कारणों से इस क्षेत्र को बेहद सुरक्षित रखा जाता है. बरसों बाद हुए इस दुर्लभ और अलौकिक दर्शन ने इस दुर्लभ दर्शन ने मंदिर प्रशासन और अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है.

त्र्यंबकेश्वर मंदिर का इतिहास

‘त्र्यंबक’ शब्द का अर्थ तीन देवता- ब्रह्मा, विष्णु और महेश से होता है. महाराष्ट्र के नासिक शहर से करीब 28 किलोमीटर दूर त्र्यंबकेश्वर महादेव का प्रसिद्ध हिंदू मंदिर स्थित है. यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. मंदिर के पास ब्रह्मगिरि पर्वत है, जिसे पवित्र गंगा नदी का उद्गम स्थान माना जाता है. यहां कुशावर्त कुंड नाम का एक पवित्र तालाब भी है. कुशावर्त कुंड का निर्माण श्रीमंत सरदार रावसाहेब पार्नेकर ने करवाया था, जिन्हें इंदौर के फड़णवीस के रूप में जाना जाता था. वहीं वर्तमान त्र्यंबकेश्वर मंदिर का निर्माण श्रीमंत नानासाहेब पेशवा ने 1755 से 1786 के बीच कराया था. यह मंदिर ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित है.

यह भी पढ़ें: गुरुग्राम के माता शीतला मंदिर में 30 जून से शुरू होगा आषाढ़ मेला, 29 जुलाई तक श्रद्धालुओं की उमड़ेगी आस्था, जानें टाइमिंग और इंतजाम

यह भी पढ़ें: July Vrat Tyohar List 2026: योगिनी एकादशी से लेकर गुरु पूर्णिमा तक, यहां देखें जुलाई में पड़ने वाले व्रत और त्योहारों की लिस्ट






Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button