
राम मंदिर दान विवाद के बीच प्रशासन की कार्रवाई जारी है. एसआईटी की रिपोर्ट के बाद 8 नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. जिसके बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. इसी बीच अब इस मामले पर सियासत तेज है. द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज का बड़ा बयान सामने आया है.
उन्होंने कहा, “मन्दिरों में ही सरकार का दख़ल क्यों है? मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे में क्यों नहीं?” उन्होंने आगे कहा, “धार्मिक स्थलों और मंदिरों में जो चढ़ावा आता है. दान पेठी और धन की जो प्राप्ती होती है. बड़े मंदिरों यह संख्या करोड़ों रुपये में होती है.”
‘मंदिरों में होने वाली आय से सार्वजनिक हित के काम हो’
सदानंद सरस्वती महाराज ने कहा, “हम लोगों का कहना यह कि मंदिरों में होने वाली आय के द्वारा जिस जिले में वह मंदिर है उस जिले के विकास के लिए उस धन से गौशाला, पाठशाला, औषधालय, धर्मशाला, सार्वजनिक हित के काम किए जाने चाहिए.”
उन्होंने कहा, “मंदिर का धन और किसी दूसरे काम में खर्च नहीं करना चाहिए. जिस क्षेत्र जो मंदिर है उस क्षेत्र के विकास के लिए धन का उपयोग करना चाहिए.” स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने आगे कहा, “मंदिर की जो बचत होती है उस बचत को उस क्षेत्र के विकास में लगाना चाहिए.”
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‘सरकार को मंदिर का पैसा खर्च करने का अधिकारी नहीं’
स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने आगे यह भी कहा, “सरकार को मंदिर का पैसा खर्च करने का अधिकार नहीं है. नहीं होना चाहिए क्योंकि सरकार धर्मनिरपेक्ष है. हमारे धार्मिक स्थान का अधिग्रहण सरकारों के द्वारा नहीं होना चाहिए.”
बता दें कि राम मंदिर में करोड़ों रुपये का कैश और सोने-चांदी के आभूषणों की चोरी के मामले से हड़कंप मचा हुआ है. इस मामले में गिरफ्तार 8 नामजद आरोपियों को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. एसआईटी ने आरोपियों के पास से अब तक 79.85 लाख रुपये बरामद करने का दावा किया है.
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