
Guna Karate Coach Abuse Case: खेल जगत और गुरु-शिष्य परंपरा को झकझोर देने वाले एक चर्चित मामले में गुना की विशेष पॉक्सो न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. न्यायालय ने एक नाबालिग कराटे खिलाड़ी के साथ लंबे समय तक यौन शोषण करने के मामले में दो कराटे कोचों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने माना कि आरोपियों ने कोच और प्रशिक्षक के रूप में मिले विश्वास का दुरुपयोग किया तथा नाबालिग खिलाड़ी का विभिन्न स्थानों पर शोषण किया. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषसिद्ध मानते हुए कठोर दंड सुनाया.
वर्ष 2021 में दर्ज हुई थी शिकायत
अभियोजन के अनुसार वर्ष 2021 में पड़ोसी जिले की रहने वाली एक नाबालिग कराटे खिलाड़ी ने गुना के कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. पीड़िता ने बताया था कि वह वर्ष 2017 से कराटे प्रशिक्षण के लिए नियमित रूप से गुना आती थी. इसी दौरान उसके संपर्क में कराटे प्रशिक्षक सचिन भटनागर और जगवीर जाटव आए. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रशिक्षण के दौरान दोनों आरोपियों ने उसका विश्वास जीतकर उसका शोषण किया.

Guna Karate Coach Abuse Case: आरोपी कोच
खेल प्रशिक्षण के दौरान बढ़ा संपर्क
जांच में सामने आया कि पीड़िता खेल गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए विभिन्न स्थानों पर जाती थी. अभियोजन के मुताबिक इसी दौरान आरोपियों ने कोच के रूप में अपनी स्थिति का लाभ उठाया और पीड़िता के साथ अनुचित व्यवहार किया. आरोप है कि उसे प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के नाम पर अलग-अलग स्थानों पर ले जाया जाता रहा. मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य तथा अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों को रिकॉर्ड किया.
शादी का झांसा देने का आरोप
अभियोजन के अनुसार मुख्य आरोपी सचिन भटनागर ने कथित तौर पर पीड़िता को शादी का भरोसा देकर अपने प्रभाव में ले लिया था. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पीड़िता मानसिक दबाव और भ्रम की स्थिति में रही. परिवार को लंबे समय तक मामले की जानकारी नहीं हो सकी. अभियोजन पक्ष ने अदालत में यह तर्क रखा कि आरोपियों ने नाबालिग की उम्र और उसकी परिस्थितियों का लाभ उठाकर उसका शोषण किया.

Guna Karate Coach Abuse Case: दूसरा आरोपी
परिवार को बताई आपबीती
कोविड-19 लॉकडाउन के बाद घटनाक्रम में बदलाव आया. अभियोजन के अनुसार जब परिवार में कुछ परिस्थितियां बनीं, तब पीड़िता ने अपनी मां और परिजनों को पूरी घटना से अवगत कराया. इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई. शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की.
विशेष न्यायालय में चली सुनवाई
मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने विशेष पॉक्सो न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा. बचाव पक्ष की दलीलें भी सुनी गईं. लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए फैसला सुनाया.
दोनों आरोपियों को उम्रकैद
विशेष न्यायाधीश सोनाली शर्मा की अदालत ने आरोपी जगवीर जाटव (40) और सचिन भटनागर (30) को दोषी करार दिया. न्यायालय ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही दोनों आरोपियों पर 7-7 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों ने एक प्रशिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में मिले विश्वास का दुरुपयोग किया.
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी
फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायालय ने कहा कि यह मामला केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य संबंधों में विश्वास के उल्लंघन का भी उदाहरण है. अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपियों के कृत्य से सामाजिक मूल्यों और खेल जगत की गरिमा को आघात पहुंचा है. न्यायालय ने ऐसे मामलों में बच्चों की सुरक्षा और विश्वास की रक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया.
अभियोजन पक्ष ने रखे प्रभावी तर्क
मामले में शासन की ओर से प्रभावी पैरवी की गई. डीपीओ हजारीलाल बैरवा के मार्गदर्शन में एडीपीओ ममता दीक्षित ने अदालत में पक्ष प्रस्तुत किया. एडीपीओ ममता दीक्षित ने बताया कि न्यायालय ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और पीड़िता के बयानों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
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