
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के परिजनों द्वारा उज्जैन में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने के कथित मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोमवार को भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीएम से कई सवाल पूछे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की.
कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार की ओर से जमीन खरीद में तेजी आई और जिन क्षेत्रों में बाद में विकास परियोजनाएं घोषित हुईं, वहां पहले से जमीन खरीदी गई. जीतू पटवारी ने कहा कि राम मंदिर में चंदा चोरी हो या महाकाल मंदिर की जमीन से जुड़े विवाद, हर मामले में भाजपा नेताओं के नाम सामने आते रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अब उज्जैन में जमीन खरीद का मामला भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
CM के परिवार के पास करीब 300 एकड़ जमीन- जीतू पटवारी
पटवारी ने कहा, ”साल 2021 में डॉ. मोहन यादव मंत्री बने और दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री बने. साल 2021 से 2025 के बीच परिवार की ओर से 253 एकड़ जमीन खरीदी गई, जबकि केवल 2024-25 के दौरान ही 168 एकड़ जमीन खरीदी गई.” कांग्रेस का दावा है कि मुख्यमंत्री के परिवार के पास कुल मिलाकर लगभग 300 एकड़ जमीन है.
जीतू पटवारी का सीएम मोहन यादव पर तंज
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आगे कहा कि मुख्यमंत्री को यह साफ करना चाहिए कि जिन क्षेत्रों में उनके परिजनों ने जमीन खरीदी, वहां पहले विकास परियोजनाओं की घोषणा हुई थी या पहले जमीन खरीदी गई और बाद में सड़क एवं अन्य परियोजनाएं लाई गईं. उन्होंने यह भी मांग की कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान या रिटायर्ड जज की निगरानी में कराई जाए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या वल्लभ भवन की पांचवीं मंजिल स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय का नाम बदलकर “मोहन यादव एंड फैमिली रियल एस्टेट” रख देना चाहिए.
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए- उमंग सिंघार
वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा, ”अब तक लोगों ने ‘केरल फाइल्स’, ‘कश्मीर फाइल्स’ जैसी बातें सुनी थीं, लेकिन अब मध्य प्रदेश में ‘मोहन यादव फाइल्स’ सामने आ रही हैं. आने वाले समय में कई अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं.” सिंघार ने आरोप लगाया कि उज्जैन में गिट्टी, रेत और अन्य संसाधनों के कारोबार पर मुख्यमंत्री के परिवार का प्रभाव है. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
उज्जैन जिले में बड़ी संख्या में प्लॉट खरीदने का दावा
दरअसल, यह विवाद इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद सामने आया है, जिसमें दावा किया गया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के सीएम बनने के बाद उनके परिजनों और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन जिले में बड़ी संख्या में जमीन खरीदी. दावा किया गया है कि दिसंबर 2023 से दिसंबर 2025 के बीच मुख्यमंत्री के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने कम से कम 137 प्लॉट खरीदे, जिनका कुल रकबा लगभग 168 एकड़ बताया गया है. इन जमीनों की खरीद पर करीब 45 करोड़ रुपए खर्च होने का भी उल्लेख किया गया है.
क्या सीएम बनने के बाद प्लॉट खरीदने की रफ्तार बढ़ी?
रिपोर्ट के मुताबिक, खरीदी गई जमीनों का बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों में स्थित है, जहां बाद में सड़क, हाईवे और अन्य विकास परियोजनाओं की घोषणा हुई. इनमें गांगेड़ी, कराड़िया, नवाखेड़ा, करोंदिया, जयवंतपुरा, चंदेसरा और उन्हेल जैसे इलाके शामिल हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री बनने से पहले भी परिवार के पास बड़ी मात्रा में जमीन थी, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद खरीद की रफ्तार बढ़ गई.
अधिकारियों ने अनियमितता से किया इनकार
हालांकि, इस मामले में राज्य सरकार के अधिकारियों ने किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार किया है. अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री के विस्तारित परिवार के सदस्य लंबे समय से रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हुए हैं और उनके निजी व्यापार को मुख्यमंत्री के पद से जोड़ना उचित नहीं है. जमीन की खरीद-बिक्री व्यापारिक गतिविधि का हिस्सा है और इसे राजनीतिक पद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.
मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों ने भी किया आरोपों का खंडन
मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों की ओर से भी आरोपों का खंडन किया गया है. परिवार के सदस्य अनंत यादव ने कहा, ”उनका परिवार साल 2010 से रियल एस्टेट कारोबार में सक्रिय है और कई परियोजनाएं पहले से संचालित हो रही हैं. आम नागरिक होने के नाते उन्हें जमीन खरीदने, विकसित करने और बेचने का कानूनी अधिकार है. उनका यह भी कहना है कि जिन परियोजनाओं का उल्लेख किया जा रहा है, उनमें से कई की योजना और जमीन के सौदे मुख्यमंत्री बनने से पहले ही शुरू हो चुके थे.