
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों के बाद मध्य प्रदेश सरकार भी सतर्क हो गई है. सरकार अब प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में दान व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने की तैयारी कर रही है. इसके तहत महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर समेत बड़े मंदिरों में क्यूआर कोड के जरिए डिजिटल दान को बढ़ावा दिया जाएगा.
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, संस्कृति और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि मंदिरों में चढ़ावे के प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी. यह समिति देश के विभिन्न बड़े मंदिरों में लागू दान और प्रबंधन व्यवस्थाओं का अध्ययन करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी. इसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी.
डिजिटल दान पर रहेगा खास जोर
सरकार का मानना है कि डिजिटल दान व्यवस्था से नकद लेनदेन कम होगा और दान राशि का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा. श्रद्धालु क्यूआर कोड स्कैन कर सीधे मंदिर के अधिकृत खाते में दान कर सकेंगे. इससे दान की राशि के हिसाब-किताब में पारदर्शिता आएगी और किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका भी कम होगी.
उधर, अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान और चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले की जांच कर रही एसआईटी ने ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों को शहर नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं.
जांच के दौरान भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी और हीरे के रिकॉर्ड में कई खामियां सामने आने की बात कही जा रही है. सूत्रों के अनुसार, जनवरी-फरवरी 2025 में महाकुंभ के दौरान मिले दान की भी विशेष जांच की जा रही है.
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श्रद्धालुओं का भरोसा बढ़ाने की कोशिश
मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि मंदिरों में तकनीक आधारित दान व्यवस्था लागू होने से श्रद्धालुओं का भरोसा और मजबूत होगा. साथ ही चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में किसी तरह के विवाद की संभावना भी कम होगी. सरकार इसे धार्मिक संस्थाओं में बेहतर प्रशासन और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है.