

UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के भीतर की रार अब खुलकर सड़कों और मीडिया के सामने आने लगी है. सहारनपुर से कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. इमरान मसूद ने अखिलेश यादव पर मुस्लिमों के हक और उनसे जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर ‘चुप्पी’ साधने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है.
NDTV से खास बातचीत करते हुए इमरान मसूद ने दो टूक अंदाज में कहा कि देश और प्रदेश में जनता से जुड़े हर मुद्दे पर सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस ही सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन कर रही है. चाहे वह NEET परीक्षा का विवाद हो, मंदिर में चंदा चोरी का मामला हो या फिर मजार-मस्जिद तोड़े जाने का मुद्दा हो, कांग्रेस हर जगह मुखरता से खड़ी नजर आती है.
‘क्या सारी जिम्मेदारी सिर्फ राहुल गांधी और कांग्रेस की है?’
अखिलेश यादव की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधते हुए इमरान मसूद ने सवाल उठाया कि जब बात मंदिर के चंदे की आती है, तो विपक्ष के बड़े नेता खूब बोलते हैं, लेकिन जब अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों की बात आती है, तो उनके मुंह सिल क्यों जाते हैं? जिस मुखरता से मंदिर की चंदाचोरी पर बात की जा रही है, उसी तरह मुस्लिमों के ऊपर हो रही सीनाजोरी के मुद्दे पर विपक्ष के बाकी नेता बात क्यों नहीं करते? तमाम मस्जिदों और मजारों को निशाना बनाया जा रहा है. काशी में डेढ़-दो सौ साल पुरानी मस्जिदों को अवैध बताकर नोटिस दिए जा रहे हैं. मुस्लिमों पर हो रहे इस जुल्म को लेकर क्या कोई दूसरा नेता मुंह खोलेगा या फिर इसकी सारी जिम्मेदारी अकेले कांग्रेस और राहुल गांधी ने ले रखी है?
मसूद ने आगे कहा कि अखिलेश यादव बहुत बड़े नेता हैं, उनके बारे में टिप्पणी करने की उनकी हैसियत नहीं है, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि जो मुस्लिम समाज समाजवादी पार्टी का सबसे मजबूत वोट बैंक रहा है, उसके ही मुद्दों पर आखिर इतनी गहरी खामोशी क्यों अख्तियार कर ली जाती है?
‘कांग्रेस कमजोर नहीं, अखिलेश के मुंह से ऐसी बातें शोभा नहीं देतीं’
दरअसल, यह पूरा विवाद तब भड़का, जब अखिलेश यादव ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कांग्रेस को कथित तौर पर ‘कमजोर’ बता दिया था. अखिलेश के इसी बयान पर पलटवार करते हुए इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस कहीं से भी कमजोर नहीं है. आज देश के भीतर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ जो भी बड़ी वैचारिक और राजनीतिक लड़ाई लड़ी जा रही है, वह सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी के नेतृत्व में ही संभव है. इमरान मसूद ने अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए कहा कि एक सहयोगी दल और देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी के बारे में ‘कमजोर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना अखिलेश जी जैसे बड़े नेता के मुंह से कतई शोभा नहीं देता. गठबंधन में ‘हम मजबूत और तुम कमजोर’ जैसी भावना राजनीति के लिए ठीक नहीं है.
‘बीजेपी से अकेले लड़ना मुमकिन नहीं, इतिहास से सीखें सहयोगी’
गठबंधन के सहयोगियों को एकजुट रहने का पाठ पढ़ाते हुए कांग्रेस सांसद ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि किसी भी क्षेत्रीय दल को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए कि वह अकेले दम पर बीजेपी का मुकाबला कर सकता है. उन्होंने याद दिलाया कि अतीत में बीजेपी ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना जैसे मजबूत क्षेत्रीय दलों के साथ क्या किया, यह सबके सामने है. इसलिए समय की मांग यही है कि सभी दल कांग्रेस का हाथ मजबूती से थामे रखें, क्योंकि अकेले लड़कर बीजेपी के अभेद्य किले को भेद पाना किसी के बस की बात नहीं है.
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दरअसल, इस सियासी घमासान के पीछे की असली वजह उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर फंसा पेंच माना जा रहा है. दोनों दलों के बीच अभी तक औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हो पाई है. इस देरी पर चिंता जताते हुए इमरान मसूद ने कहा कि अगर हमें वाकई पूरी ईमानदारी और मजबूती के साथ चुनाव लड़ना है, तो दोनों दलों को तुरंत मेज पर बैठकर सीटें तय करनी होंगी. अगर सीटों के बंटवारे में देरी होती है और कार्यकर्ताओं व जनता के बीच कन्फ्यूजन की स्थिति बनी रहती है, तो इसका सीधा नुकसान गठबंधन को ही उठाना पड़ेगा. उन्होंने मांग की है कि बिना वक्त गंवाए सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय किया जाए.





