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भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा पुरावशेष पहुंचे अरुणाचल, तवांग से शुरू होगी 3 हफ्ते की प्रदर्शनी | lord-buddha-piprahwa-relics-reach-arunachal-pradesh-tawang-exhibition-3-weeks-pema-khandu-pm-modi



ईटानगर:

भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा पुरावशेष शनिवार को अरुणाचल प्रदेश पहुंच गए. पूर्वोत्तर के इस राज्य में तीन हफ्ते तक इन अवशेषों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसकी शुरुआत तवांग से होगी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इस प्रदर्शनी से श्रद्धालुओं को बौद्ध विरासत से करीब से जुड़ने का अवसर मिलेगा.

कहां-कहां होगी प्रदर्शनी

इन पवित्र पुरावशेष को सबसे पहले प्रसिद्ध तवांग स्मारक में प्रदर्शित किया जाएगा. इसके बाद इन्हें बोमडिला और नामसाई ले जाया जाएगा.

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि उन्होंने तवांग वायुसेना स्टेशन पर इन पवित्र पुरावशेष की अगवानी की. उन्होंने इन्हें नयी दिल्ली से सुरक्षित पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना का आभार भी जताया.

खांडू ने कहा, ‘तवांग और अरुणाचल प्रदेश के लोगों के लिए यह ऐतिहासिक और बेहद विनम्र कर देने वाला क्षण है… दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए ये पवित्र पुरावशेष भगवान बुद्ध से गहरे जुड़ाव का प्रतीक हैं.’

मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने तवांग मठ में आयोजित पारंपरिक बौद्ध अनुष्ठानों में भी हिस्सा लिया. इन अनुष्ठानों में ‘थ्रिसोल’ जो पवित्र अवशेषों के शुद्धिकरण से जुड़ा है, ‘रामने’ जो बुरी शक्तियों को दूर करने के लिए और ‘मंडल तेनसुंग’ जो पवित्र अवशेषों के कल्याण के लिए प्रार्थना है, शामिल थे.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह प्रदर्शनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और अरुणाचल प्रदेश की भारत की बौद्ध विरासत में विशेष जगह है. तवांग मठ इस विरासत का स्थायी प्रतीक है.

दलाई लामा ने अपने संदेश में कहा कि इन अवशेषों के दर्शन करना और उन्हें श्रद्धांजलि देना पुण्य का स्रोत माना जाता है.

क्या है पिपरहवा का इतिहास?

उत्तर प्रदेश के वर्तमान सिद्धार्थनगर जिले में स्थित पिपरहवा का बौद्ध धर्म के पुरातात्विक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है. वर्ष 1898 में विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने इस स्थल पर एक स्तूप की खुदाई की थी और वहां अस्थियों के टुकड़ों वाले अवशेष पात्र मिले थे. 

इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 1971 से 1977 के बीच यहां आगे खुदाई की और दो और अवशेष पात्र मिले, जिन्हें पारंपरिक रूप से भगवान बुद्ध से जुड़ा माना जाता है.





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