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यूरोप में गदर: जर्मनी में लूटी गईं दुकानें, फ्रांस से लेकर पुर्तगाल उबल रहा, पोलैंड की अजब स्थिति | Europe Crisis Shops Loot In Germany Unrest Spreading From France To Portugal Intresting situation in Poland



यूरोप में मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक देश में आग ठंडी हो रही है तो दूसरे देश में पकड़ ले रही है. फ्रांस के अधिकारियों ने रविवार को राहत की सांस ली, क्योंकि विरोध-प्रदर्शनों में पिछले सप्ताहांत की तुलना में कम हिंसा हुई. लेकिन पुलिस को नए प्रदर्शनों की आशंका है, क्योंकि इस आंदोलन के केंद्र में रहे हाई स्कूल, पतझड़ की छुट्टियों के बाद सोमवार को फिर से खुल रहे हैं.

जर्मनी में लूटपाट

जर्मनी को भी अपनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जहां शनिवार को हुए देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कुछ शहरों में उपद्रवियों ने पुलिस पर हमला किया और दुकानों में लूटपाट की. रविवार को जर्मनी के कई राजनेताओं ने युवाओं के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों और लूटपाट की आलोचना की. हालांकि, कुछ नेताओं ने यह भी चेतावनी दी कि इन घटनाओं की वजह से प्रदर्शनकारियों की मांगें कहीं दब न जाएं. 

पुर्तगाल में भी उपद्रव

पुर्तगाल में आवास संकट को लेकर हुए ताजा टकराव में, रविवार तड़के लिस्बन और पोर्टो में दंगा-रोधी पुलिस ने कुत्तों के साथ प्रदर्शनकारियों के शिविरों पर धावा बोल दिया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाईं, 13 लोगों को गिरफ्तार किया और दर्जनों लोग घायल हो गए.
सुबह करीब 4:30 बजे, दर्जनों पुलिसकर्मी लिस्बन के रोसियो स्क्वायर और पोर्टो के डोम जोआओ I स्क्वायर में बने शिविरों की ओर बढ़े, जिसके तुरंत बाद झड़पें शुरू हो गईं. पुलिस ने एक बयान में बताया कि वहां से हटने के आदेश नहीं मानने पर लिस्बन में छह और पोर्टो में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस के अनुसार, इस दौरान 13 पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें से आठ को अस्पताल ले जाना पड़ा.

पोलैंड में पीएम-राष्ट्रपति भिड़े

वहीं पोलैंड में अलग लेवल का ही बवाल है. यहां राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ही आपस में टकरा गए हैं. वजह है न्यायपालिका. पोलैंड के संवैधानिक न्यायालय में हुए नाटकीय टकराव के बाद, शनिवार को राष्ट्रपति कैरोल नाव्रोकी ने राजनीतिक नेताओं के साथ संकट पर बातचीत की. न्यायालय के जजों की नियुक्ति को लेकर हुए इस विवाद ने यूरोपीय संघ के इस देश में एक संवैधानिक संकट पैदा कर दिया है, जहां एक मध्यमार्गी सरकार का मुकाबला एक राष्ट्रवादी राष्ट्राध्यक्ष और विपक्ष से हो रहा है.

प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार कई हफ्तों से न्यायालय के जजों को हटाने की कोशिश कर रही है. उनका तर्क है कि ये जज राजनीतिक रूप से निष्पक्ष नहीं हैं. उन्हें दक्षिणपंथी पार्टी ‘पीआईएस’ के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि इन्हीं की पिछली सरकार ने इन जजों को नियुक्त किया था.

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