

नई दिल्ली:
विपक्ष की ओर से शनिवार को मॉक पार्लियामेंट की गई. ये मॉक पार्लियामेंट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई. विपक्ष ने इसे ‘जन महाभियोग’ नाम दिया है. इस दौरान खरगे ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर चुनाव आयोग चला रहे हैं.
उन्होंने एक प्रस्ताव रखते हुए यह भी कहा कि विपक्ष का ज्ञानेश कुमार से कोई निजी बैर नहीं है, बल्कि उसकी मांग है कि आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करे.
कांग्रेस और विपक्ष की ओर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जो प्रस्ताव पेश किया गया, उसमें 6 बड़े आरोप लगाए गए हैं.
क्या-क्या आरोप लगाए?
- चुनाव चुराने की साजिश रची गई.
- 13.2 करोड़ वोटरों के नाम हटा दिए गए.
- संसद की निगरानी या जानकारी के बिना ‘फॉर्म 6’ को बदल दिया.
- ECINET के जरिए इलेक्टोरल रोल पर कब्जा कर लिया.
- बाकी दो चुनाव आयुक्तों को प्रक्रिया से बाहर रखा.
- मोदी और शाह के इशारे पर काम किया.
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खरगे ने क्या-क्या कहा?
मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने सत्ता बरकरार रखने के लिए ‘साजिश’ रची है और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने कहा, ‘ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर चुनाव आयोग को चला रहे हैं. हमारा उनसे कोई निजी बैर नहीं है. हम सिर्फ यह चाहते हैं कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम करे और देश के लोगों के मताधिकार की रक्षा हो.’
खरगे ने साल 2023 के चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इसे ‘जबरन पास’ कराया गया और इसी कानून के कारण ज्ञानेश कुमार कथित तौर पर ‘वोट चोरी’ कर पा रहे हैं.
उन्होंने दावा किया कि ‘वोट चोरी’ पकड़े जाने के बाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू की गई.
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की लड़ाई वोटर लिस्ट में ‘घुसपैठियों’ के नाम जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में बनाए रखने के लिए है.





