

NDTV World Summit 2026: महंगाई जब बढ़ती है, तो सबसे पहले आम आदमी की जेब पर असर पड़ता है, और इसका सीधा कनेक्शन लोन की ब्याज दरों और EMI से भी होता है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाले दिनों में सस्ता लोन मिलना मुश्किल हो जाएगा? NDTV वर्ल्ड समिट में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान से इस सवाल के कुछ अहम संकेत मिले हैं. उन्होंने साफ कहा कि ज्यादा महंगाई हर किसी पर एक ‘टैक्स’ की तरह भारी पड़ती है, इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सबसे पहली और बड़ी प्राथमिकता महंगाई को काबू में रखना है.
महंगाई पर काबू रखना क्यों जरूरी?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक महंगाई को तय लक्ष्य के दायरे में रखने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि आम लोगों के लिए आखिर में रियल रिटर्न मायने रखता है. यानी महंगाई को ध्यान में रखने के बाद उनके पैसे की असली वैल्यू कितनी बचती है. RBI का लक्ष्य महंगाई को 4% पर रखना है. इसके लिए 2% की छूट ऊपर और नीचे, यानी 2% से 6% तक का दायरा तय किया गया है.
करीब 4 साल बाद बढ़ाई गई रेपो रेट
महंगाई बढ़ने और कई चीजों की कीमतों पर दबाव दिखने के बाद RBI की छह सदस्यों वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने इस महीने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का फैसला सर्वसम्मति से लिया.RBI ने करीब चार साल में पहली बार ब्याज दर बढ़ाई है. इस पर गवर्नर ने कहा कि मौजूदा हालात में ब्याज दरों को धीरे-धीरे बढ़ाने की नीति अपनाना सही कदम है.
महंगाई रोकने के लिए महंगा हो सकता है लोन
संजय मल्होत्रा ने माना कि रेपो रेट बढ़ने से ब्याज दरें और कर्ज लेने की लागत बढ़ सकती है. इसका असर आम लोगों और कारोबारियों पर भी पड़ता है. लेकिन उन्होंने कहा कि यह कदम महंगाई को कम करने के मकसद से उठाया गया है, जो सभी के हित में है.
सितंबर में 5.54% पर पहुंची खुदरा महंगाई
सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% हो गई. प्याज और दूसरी खाद्य चीजों की ऊंची कीमतें इसकी बड़ी वजह रहीं. हालांकि, महंगाई अभी RBI की तय सीमा के अंदर है.
7.8% की GDP ग्रोथ से मजबूत अर्थव्यवस्था के संकेत
महंगाई की चिंता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की GDP ग्रोथ 7.8% रही.RBI गवर्नर ने कहा कि इस दौरान निवेश में 12% की बढ़ोतरी हुई और एक्सपोर्ट में भी डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई. उन्होंने बताया कि पहली तिमाही में का इकनॉमिक ग्रोथ फायदा कई सेक्टर में दिखा. सीमेंट, स्टील, कर्ज, टैक्स और गाड़ियों की बिक्री जैसे ताजा आंकड़े भी अर्थव्यवस्था की मजबूती दिखा रहे हैं. संजय मल्होत्रा के मुताबिक, सुधारों, सरकारी नीतियों और बनाए गए ढांचे से अर्थव्यवस्था को सहारा मिल रहा है.
सस्ते लोन पर क्या बोले RBI गवर्नर?
RBI के ताजा कदम और गवर्नर के बयान से साफ है कि फिलहाल महंगाई को काबू में रखना प्राथमिकता है. रेपो रेट बढ़ने से लोन की ब्याज दरों पर दबाव आ सकता है. ऐसे में सस्ते लोन की उम्मीद इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले समय में महंगाई किस तरह रहती है और RBI ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला करता है.
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