

सांसद हनुमान बेनीवाल की भाभी बनी सरपंच, सगी बहन को हराया चुनाव (फोटो:NDTV)
राजस्थान पंचायत चुनाव में पहले चरण की वोटिंग के बात नतीजे आने भी शुरू हो गए हैं. राजस्थान के कई गांवों में मुकाबला दिलचस्प रहा है. नागौर जिले के पंचायत चुनावों में कांटे का मुकाबला दिख रहा है. सांसद हनुमान बेनीवाल के पैतृक बरणगांव में उनकी दो भाभियां ही सरपंच पद के लिए आमने-सामने थी. जिससे इस पंचायत चुनाव की चर्चा राजस्थान से बाहर भी हो रही थी. खास बात यह है कि हनुमान बेनीवाल की दोनों भाभियां मीरा बेनीवाल और राजबाला बेनीवाल सगी बहने थी, लेकिन सरपंच बनने के लिए चुनाव मैदान में आमने-सामने थी. उनकी एक भाभी ने सरपंची के चुनाव में दूसरी को हरा दिया.
हनुमान बेनीवाल की भाभी राजबाला बनी सरपंच
हनुमान बेनीवाल के बरणगांव ग्राम पंचायत में उनके बडे़ भाई की पत्नी राजबाला ने 149 वोटों से जीत हासिल की है. जबकि दूसरे भाई की पत्नी मीरा बेनीवाल को हार का सामना करना पड़ा है, उन्हें केवल 21 वोट मिले हैं. बरणगांव में कुल 6 महिला प्रत्याशी आमने-सामने थी. लेकिन जीत इस बार भी बेनीवाल परिवार को ही मिली है. उनके बड़े भाई रामप्रसाद बेनीवाल इसी गांव में 25 साल तक सरपंच रहे हैं, लेकिन उनकी पत्नी मीरा बेनीवाल को हार का सामना करना पड़ा है. जबकि दूसरे भाई प्रेमसुख बेनीवाल की पत्नी राजबाला इस बार सरपंच बनने में कामयाब रही है. हनुमान बेनीवाल का पेतृक गांव होने की वजह से इस पंचायत की सबसे ज्यादा चर्चा थी.
राजबाला और मीरा सगी बहनें
खास बात यह है कि सरपंच के चुनाव के लिए मैदान में उतरी हनुमान बेनीवाल की दोनों भाभियां आपस में सगी बहने हैं. सरपंच बनी राजबाला हनुमान के बड़े भाई प्रेमसुख बेनीवाल की पत्नी हैं, जबकि चुनाव हारने वाली मीरा बेनीवाल हनुमान बेनीवाल के दिवंगत बड़े भाई रामप्रसाद बेनीवाल की पत्नी हैं. रामप्रसाद बेनीवाल खुद करीब 25 साल पहले बरणगांव के सरपंच रह चुके थे. एक ही घर की दो बहुओं और सगी बहनों के आमने-सामने आ जाने से पूरे नागौर जिले की नजरें इस गांव के चुनावी दंगल पर टिक गई थीं, लेकिन नतीजों में खास बात यह रही है कि गांव की सरपंची इस बार भी बेनीवाल परिवार के पास ही रहेगी.
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चुनाव से दूर थे हनुमान बेनीवाल
हालांकि अपने पैतृक गांव में सरपंची के चुनाव में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने खुद को पूरी तरह से दूर रखा था. उन्होंने दोनों भाभियों में से किसी के भी पक्ष में खुलकर प्रचार नहीं किया था. गांव में अंदरूनी तौर पर राजनीतिक समीकरण काफी गहरे थे. बरणगांव में सरपंच पद के लिए कुल 7 महिला प्रत्याशी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रही थीं, लेकिन मुख्य मुकाबला इन्हीं दोनों बहनों के इर्द-गिर्द सिमटा रहा. चुनावी नतीजों के बाद अब बेनीवाल परिवार की छोटी बहू राजबाला बेनीवाल के सिर गांव के विकास की जिम्मेदारी आ गई है.
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