
नई दिल्ली:
रजनीकांत ने जेलर 2 के साथ बॉक्स ऑफिस की दुनिया में अपना राज कायम रखा है. उन्होंने ना केवल दूसरे बड़े स्टार्स को पछाड़ा बल्कि अपनी ही फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ जेलर 2 के साथ अपनी बादशाहत कायम रखी, सैकनिक्ल पर दी गई ताजा रिपोर्ट के मुताबिक Jailer2 ने 2.0 के लाइफ टाइम बिजनेस यानी कि 704.50 करोड़ के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया है. साथ ही वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली कॉलीवुड (तमिल) फिल्म बन गई है.
साल 1999 में फिल्म पदयप्पा की रिलीज के बाद से किसी और तमिल एक्टर ने ‘इंडस्ट्री हिट’ नहीं दी है. यह रजनीकांत ही हैं सिर्फ रजनीकांत जिन्होंने लगातार अपने ही रिकॉर्ड तोड़े हैं. चंद्रमुखी से लेकर शिवाजी, एंथिरन, कबानी, 2.0 और अब जेलर 2 तक लंबे समय से तमिल सिनेमा लवर्स की दुनिया में केवल रजनीकांत ही हीरो हैं. थलाइवा का दबदबा बरकरार है. उनका प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है. रजनीकांत 76 साल की उम्र में भी इतिहास रच रहे हैं और साबित कर रहे हैं कि उनका सुपरस्टारडम वाकई सबसे अलग है. थलाइवा के फैन्स का कहना है कि ऐसा दबदबा पहले कभी नहीं देखा गया और शायद ही कभी दोबारा देखने को मिले.

Photo Credit: @rajinikanth/X
रजनीकांत शुरुआत से ही एक्शन जॉनर के किंग रहे हैं. दर्शकों ने उन्हें स्क्रीन पर भावुक होते देखा, रोमांस करते देखा और दुश्मनों की लंका लगाते भी देखा और कमाल की बात ये है कि उन्हें हर अंदाज में प्यार मिला है. यह वजह कै उनकी फिल्में फुल मसाला फिल्में होती हैं. रजनीकांत ने भी अपने किरदारों के साथ एक्सपेरिमेंट कर वर्सेटैलिटी दिखाई है. रोबोट, 2.0 उनकी कुछ इसी तरह की एक्सपेरिमेंटल फिल्में हैं. रजनीकांत ने रोबोट बनकर भी पर्दे पर खूब तारीफ पाई थी. पिछले 27 साल से इंडस्ट्री में अपना नाम बनाए रखना कोई छोटी बात नहीं.
बस कंडक्टर से बने सुपरस्टार
एक पुलिस कॉन्स्टेबल के बेटे, रजनीकांत की शुरुआत बहुत ही साधारण थी. उनका जन्म 12 दिसंबर 1950 को हुआ. नाम रखा गया शिवाजी राव गायकवाड़. उनके माता-पिता महाराष्ट्रीयन थे और बैंगलोर में रहते थे. रजनीकांत ने पांच साल की उम्र में अपनी मां को खो दिया. उनका परिवार बहुत गरीब था और उन्हें अपना गुजारा करने के लिए सालों तक काफी संघर्ष करना पड़ा.
कम उम्र में ही रजनीकांत ने कई तरह के छोटे-मोटे काम किए, और बाद में कर्नाटक ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन में बस कंडक्टर बन गए. रजनीकांत के अंदर जन्म से एक कलाकार था वे बस में सफर करने वाले यात्रियों का मनोरंजन करते रहते थे. सबसे पहले उन्हीं यात्रियों ने रजनीकांत को एक्टर बनने का सुझाव दिया. उन्होंने कन्नड़ नाटकों में काम करना शुरू किया, जिसमें महाभारत पर आधारित एक नाटक में दुर्योधन (खलनायक) का किरदार निभाना अहम था.

1973 में, एक दोस्त से कुछ पैसे लेकर रजनीकांत ने मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट में एडमिशन लिया. इसी दौरान एक नाटक में उनकी एक्टिंग देखकर डायरेक्टर के. बालचंदर उनसे खासे इम्प्रेस हुए. उन्होंने रजनीकांत को तमिल सीखने की सलाह दी और 1975 की तमिल फिल्म ‘अपूर्वा रागंगल’ में उन्हें एक कैंसर मरीज का किरदार दिया.
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यह फिल्म नेशनल अवार्ड जीतने में सफल रही. हालांकि इस फिल्म में रजनीकांत का रोल छोटा था, लेकिन इसने उनके लिए आगे के बड़े और बेहतर मौकों के रास्ते खोल दिए. अगले कुछ सालों में रजनीकांत को ‘अवरगल’ और ‘मूंद्रु मुदिचु’ जैसी फिल्मों में विलेन के किरदार मिले. 1977 की तेलुगु फिल्म ‘चिलकम्मा चेप्पिंडी’ में उन्हें पहली बार लीड रोल मिला. इसके बाद 1978 में आई फिल्म ‘भैरवी’ ने उन्हें तमिल सिनेमा में पहली बार लीड रोल निभाने का मौका दिया. इसके बाद, उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.





