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परिसीमन बिल की चर्चा के बीच MP में राज्यसभा उपचुनाव का ऐलान, केंद्रीय मंत्री ने दिया था इस्तीफा, किसे मिलेगा मौका ? | rajya sabha by election one seat madhya pradesh after resignation l murugan bjp preparations delimitation bill


परिसीमन बिल की चर्चा के बीच MP में राज्यसभा उपचुनाव का ऐलान,  केंद्रीय मंत्री ने दिया था इस्तीफा, किसे मिलेगा मौका ?

एमपी में राज्यसभा की एक सीट पर उपचुनाव का हुआ ऐलान (फाइल फोटो)

एक तरफ परिसीमन बिल की चर्चा तेज हैं, वहीं दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट पर उपचुनाव का ऐलान कर दिया है. इस सीट पर 12 नवंबर को चुनाव होगा. मोदी सरकार में मंत्री रहे एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई थी. उन्होंने केंद्रीय मंत्री परिषद के साथ-साथ राज्यसभा सांसद पद से भी इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद यहां उपचुनाव होने वाला है. एमपी में बीजेपी विधायकों की संख्या बल के हिसाब से सीट भाजपा का जीतना तय माना जा रहा है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा की भाजपा इस खाली सीट से किसे मैदान में उतारती है. 

मध्य प्रदेश की इस राज्यसभा सीट पर 2 नवंबर से फॉर्म जमा होंगे, फॉर्म निकालने की आखिरी तारीख 5 नवंबर है और 12 नवंबर को वोटिंग होगी. जबकि उसी दिन रिजल्ट आएगा. लेकिन वोटिंग की उम्मीद कम है. इस सीट का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक है. 

एल. मुरुगन ने दिया था इस्तीफा 

दरअसल, तमिलनाडु से आने वाले डॉ. एल. मुरुगन को बीजेपी ने एमपी से राज्यसभा भेजा था. उन्हें मोदी मंत्रिपरिषद में भी शामिल किया गया था. लेकिन हाल ही में उन्होंने 14 अक्टूबर को मंत्री पद और सांसद दोनों से इस्तीफा दे दिया था, जिसकी वजह से एमपी की यह राज्यसभा सीट खाली हो गई थी. इस सीट पर बीजेपी की जीत तय है, लिहाजा इस बात की संभावना कम है कि कांग्रेस उम्मीदवार खड़ा करेगी. 

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एमपी में बीजेपी के 164 विधायक 

मध्य प्रदेश में फिलहाल बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 65 विधायक हैं, 1 विधायक भारतीय आदिवासी पार्टी का है. इस लिहाज से बीजेपी यह सीट आसानी से जीत जाएगी. यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में इस सीट पर प्रत्याशी के चयन को लेकर अभी से चर्चा तेज हो गई है. 

किसे मिलेगा मौका

खास बात यह है कि राज्यसभा चुनाव में भाजपा इस सीट पर किसे मौका देगी इस पर सबकी नजरे हैं. पिछली बार भाजपा ने तमिलनाडु से आने वाले एल मुरुगन को भेजा था. ऐसे में इस बार इस बात पर भी सबकी नजरें रहेगी की भाजपा किसी स्थानीय नेता को मौका देगी या फिर किसी बाहरी नेता को ही प्रत्याशी बनाएगी. खास बात यह है कि मोदी मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में तेज हैं, ऐसे में यह एक सीट ही अहम मानी जा रही है. 

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