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‘हमारे यहां हर रोज प्रोटेस्ट’, भारत में विरोध प्रदर्शनों पर बोले अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो | us Marco Rubio on india protest media question says We have protests everyday



पिछले कुछ दिनों से भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शनों की चर्चा इंटरनेशनल लेवल पर हो रही है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मीडिया ने इससे जुड़ा सवाल कर दिया. इस पर वे गोल-मोल जवाब देते हुए सवाल को टालते नजर आए. जब उनसे पूछा गया कि भारत में हो विरोध प्रदर्शनों पर आपका क्या कहना है, तो उन्होंने इसके जवाब में कहा कि अमेरिका में हर रोज प्रोटेस्ट होते रहते हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मीडिया के सवाल का जवाब देते हुए कहा, “यह उनका (भारत) आंतरिक राजनीतिक मामला है. भारत एक लोकतांत्रिक देश है और वहां चुनाव होते हैं, इसलिए मैं उनके आंतरिक राजनीतिक मामलों पर कोई राय नहीं दूंगा. अमेरिका में भी तो हर दिन विरोध-प्रदर्शन होते रहते हैं.”

मार्को रुबियो भारत के दो दिवसीय दौरे पर हैं. उन्होंने पाकिस्तान और चीन के साथ वॉशिंगटन के बढ़ते संबंधों को लेकर नई दिल्ली की चिंताओं को दूर करते हुए कहा, “किसी भी देश के साथ अमेरिका के रिश्ते कभी भी भारत की कीमत पर नहीं होंगे.”

अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के साथ बातचीत में रुबियो ने ट्रम्प प्रशासन के पाकिस्तान के साथ बढ़ते संबंधों के बारे में बात करते हुए कहा, “दुनिया के किसी भी देश के साथ हमारे संबंध, किसी भी तरह से, भारत के साथ हमारे संबंधों की कीमत पर नहीं हैं. भारत के साथ अपने रिश्तों को हम इस नजरिए से नहीं देखते हैं. मुझे उम्मीद है कि यहां मेरे दौरे, व्यापार समझौता करने के लिए हमारी प्रतिबद्धता, हमारी अब तक की सभी बातचीत और हम मिलकर जो भी काम करते हैं, वे इस बात का सबूत हैं.”

पाकिस्तान के साथ रिश्ते पर क्या बोले?

मार्को रुबियो ने आगे कहा कि इस्लामाबाद के साथ वॉशिंगटन के संबंध उसे ऐसी स्थिति में लाते हैं, जहां वह भारत को चिंता में डालने वाली गतिविधियों को ‘रोकने’ में मदद कर सकता है.

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जिसके साथ हमारे संबंध हैं और होने भी चाहिए. कुछ मायनों में यह एक पॉजिटिव पहलू हो सकता है, अगर हम ऐसी गतिविधियों को रोकने में मदद कर सकें, जिनसे टकराव पैदा हो सकता है. यानी अगर हम अपने प्रभाव का इस्तेमाल सकारात्मक तरीके से कर सकें.”

रुबियो ने यूक्रेन में रूस के चार साल पुराने युद्ध को खत्म करने में आने वाली कठिनाइयों को भी स्वीकार किया. उन्होंने कहा, “ये चीजें कठिन हैं और अगर इस जंग को सुलझाना आसान होता, तो यह बहुत पहले ही सुलझ गया होता.”

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