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7 साल की उम्र में भी बिस्तर गीला करता है बच्चा? हर बार खराब आदत नहीं, इसके पीछे हो सकती हैं ये वजहें | child-still-wetting-bed-at-age-7-not-always-a-behavioural-problem



रात के बीच में बच्चे का बिस्तर फिर से गीला देखकर कई पेरेंट्स परेशान हो जाते हैं. 7 साल की उम्र तक पहुंचने के बाद भी अगर बच्चा बेवेटिंग करता है, तो घर में अक्सर यही सवाल उठता है कि आखिर कैसे बच्चे की इस आदत को छुड़वाया जाए. कई बार पेरेंट्स अपने बच्चों को डांटते हैं और फिर आगे ऐसी लापरवही न करने की सलाह लेते हैं. दअसल, उन्हें लगता है कि बच्चे ऐसा आलस या फिर लापरवाही के चलते कर रहे हैं. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि हर बार इसके पीछे गलत आदत या अनुशासन की कमी जिम्मेदार नहीं होती. बेडवेटिंग, जिसे मेडिकल भाषा में नॉक्टर्नल एन्यूरिसिस कहा जाता है,

नॉक्टर्नल एन्यूरिसिस एक ऐसी स्थिति है जिसके पीछे शारीरिक, जेनेटिक और इमोशनल कारण हो सकते हैं. ऐसे में बच्चे को दोष देने के बजाय समस्या की जड़ तक पहुंचना और सही मदद देना ज्यादा जरूरी है. हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि इसके पीछे शारीरिक और इमोशनल दोनों कारण हो सकते हैं, इसलिए बच्चों को डांटने या शर्मिंदा करने के बजाय समस्या की असली वजह समझना जरूरी है. इस विषय को अच्छे से समझने के लिए हमने यूरोलॉजिस्ट और मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बातचीत की है, यहां जानते हैं आखिर 7 साल का बच्चा बिस्तर गीला क्यों करता है?

क्यों होती है बेडवेटिंग की समस्या?

सीके बिड़ला हॉस्पिटल के डायरेक्टर यूरोलॉजी डॉ. संदीप हरकर का कहना है कि कई बच्चों में ब्लैडर का विकास इतना नहीं हुआ होता कि वह पूरी रात पेशाब रोक सके. कुछ बच्चों के शरीर में रात के समय अधिक मात्रा में यूरिन बनता है. वहीं, कुछ बच्चे ब्लैडर भरने के बावजूद नींद से नहीं जाग पाते.

डॉ. हरकर बताते हैं कि कब्ज, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, डायबिटीज और कुछ मामलों में नींद के दौरान सांस लेने में आने वाली समस्याएं भी बेडवेटिंग की वजह बन सकती हैं. इसके अलावा परिवार में किसी को बचपन में ये समस्या रही हो, तो बच्चे में भी इसका रिस्क बढ़ सकता है. इसलिए लगातार बिस्तर गीला करना हमेशा अनुशासन या टॉयलेट ट्रेनिंग की कमी का संकेत नहीं होता.

बच्चे को डांटना स्थिति को कर सकता है और भी खराब

माधुकर रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की पीडियाट्रिक साइकोलॉजिस्ट श्रेया सिंघल कहती हैं कि स्कूल का तनाव, बुलिंग, परिवार में बदलाव या अन्य इमोशनल प्रेशर  कुछ बच्चों में बेडवेटिंग को ट्रिगर कर सकते हैं या उसे बढ़ा सकते हैं. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि बच्चा जानबूझकर ऐसा कर रहा है.

उनका कहना है कि बच्चे को डांटना, पीटना, धमकाना या दूसरों से तुलना करना उसके अंदर शर्म, चिंता और हीन भावना पैदा कर सकता है. इससे समस्या कम होने के बजाय और बढ़ सकती है. माता-पिता को ऐसी स्थिति में बच्चे को खुद पर भरोसा दिलाने की जरूरत होती है कि ऐसा करना उसकी गलती नहीं होती है और वे इस स्थिति में बच्चे के साथ हैं. 

बेडवेटिंग की परेशानी होने पर पेरेंट्स क्या करें?

  1. हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि बच्चे को दिन में नियमित रूप से टॉयलेट जाने की आदत डालें और सोने से पहले पेशाब जरूर कराएं. 
  2. दिनभर पर्याप्त पानी पिलाएं, लेकिन सोने से ठीक पहले ज्यादा तरल पदार्थ देने से बचें. 
  3. अगर बच्चे को कब्ज की समस्या है तो उसका इलाज कराना भी जरूरी है.

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