

हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है. कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है. पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है. 21 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि दोपहर 2:12 बजे तक रहेगी. इसके बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी. बुधवार को सुबह 6:30 बजे सूर्योदय और शाम 5:52 बजे सूर्यास्त होगा. वहीं, दोपहर 2:50 बजे चंद्रोदय और रात 2:33 बजे चंद्रास्त होगा.
चित्रा नक्षत्र के स्वामी है मंगल ग्रह
पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में रहेंगे. ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं या इस नक्षत्र में स्थित होते हैं तो इसके विशेष और गहरे प्रभाव देखने को मिलते हैं. चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं जिन्हें सूर्य का मित्र माना जाता है. सूर्य और मंगल के इस मेल से व्यक्ति के भीतर गजब का आत्मविश्वास, साहस, पराक्रम और ऊर्जा बढ़ती है. नौकरीपेशा लोगों के काम की उच्च अधिकारियों द्वारा सराहना होती है. प्रशासन, उच्च पदों या प्रबंधन से जुड़े लोगों को विशेष लाभ, नई जिम्मेदारी या प्रमोशन मिल सकते हैं. बुधवार रात 12:32 बजे तक गंड योग रहेगा. ज्योतिष के अनुसार, गंड योग अशुभ या चुनौतीपूर्ण माना जाता है. इस योग में जन्मे या इसके प्रभाव वाले जातक कभी-कभी अस्थिर, जटिल, शीघ्र क्रोधित होने वाले या चिंताशील स्वभाव के हो सकते हैं.
कब है अभिजीत मुहूर्त
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:40 से दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा. यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है. आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है. माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं. जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है. बुधवार को सुबह 8:37 से 10:20 बजे तक अमृतकाल रहेगा. ज्योतिष और पंचांग के अनुसार अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है. इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है. इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है. यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है.
कब है राहुकाल का समय
इस दिन राहुकाल दोपहर 12:11 बजे से 1:36 बजे तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकााला जाता है जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है. स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है. इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है.
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आज कब लगेगा यमगंड काल
बुधवार को यमगंड काल सुबह 7:55 से 9:20 बजे तक रहेगा. यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ मााना जाता है. इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. नया व्यापार या नया कााम शुरू करने से बचना चाहिए. इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए.
कब से शुरू होगा गुलिक काल
इस दिन गुलिक काल सुबह 10:46 से दोपहर 12:11 बजे तक रहेगा. गुलिक काल को ‘विषैला समय’ भी कहा जाता है. यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है. माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं. इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चााहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं उन्हें जारी रखा जा सकता है. जो काम बार-बार करने हों, वे इस काल में किए जा सकते हैं. बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है.
आज इस राशि में बनेगा त्रिग्रही योग
बुधवार को सूर्य तुला राशि में रहेंगे. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य का तुला राशि में प्रवेश होना खास प्रभाव डालता है क्योंकि तुला राशि में सूर्य नीच के (कमजोर) माने जाते हैं. तुलाा राशि में सूर्य के आने से इनकी ऊर्जा में कमी आती है जिससे आत्मविश्वास या निर्णय क्षमता में कुछ उताार-चढ़ाव आ सकता है. तुला राशि में सूर्य के साथ बुध और शुक्र की मौजूदगी से त्रिग्रही योग (बुधादित्य और शुक्रादित्य योग) का निर्माण होता है जो कुछ राशियों और आर्थिक मामलों के लिए मिला-जुला असर देता है. इस दिन चंद्र देव सुबह 7 बजे के बाद कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे. ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा का कुंभ राशि (जिसके स्वामी शनि हैं और यह वायु तत्व की राशि है) में होना व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक स्वभाव को गहरा प्रभावित करता है. कुंभ राशि में चंद्रमा होने पर व्यक्ति भावनाओं से ज्यादा दिमाग और तर्क से काम लेता है. वह किसी भी बात को गहराई से समझकर निर्णय लेता है. बुधवाार को दिशाशूल उत्तर दिशा, उत्तर पूर्व (ईशान कोण) में रहेगा. ज्योतिष और वाास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है.
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