मध्य प्रदेश

धर्मशाला में बनेगा इंटरनेशनल लेवल का आइस स्केटिंग रिंक, बदलेगी शहर की तस्वीर


मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को कांगड़ा जिले के धर्मशाला में खेल सुविधाओं के विस्तार और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुरुआत की. मुख्यमंत्री ने सकोह में 33.78 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इंडोर आइस स्केटिंग रिंक एवं रोलर स्केटिंग रिंक की आधारशिला रखी.

इसके साथ ही उन्होंने धर्मशाला शहर में 9.82 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित अत्याधुनिक सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन सुविधा का लोकार्पण किया. इस परियोजना से शहर के सात वार्डों के लगभग 7,500 परिवारों को लाभ मिलेगा.

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खेल सुविधाओं को मिलेगा बढ़ावा

सकोह में बनने वाले इंडोर आइस स्केटिंग रिंक एवं रोलर स्केटिंग रिंक परिसर में आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. भवन के बेसमेंट में जिम, बिलियर्ड्स रूम और कैफे की सुविधा होगी, जबकि ग्राउंड फ्लोर पर वीआईपी लाउंज बनाया जाएगा. ऊपरी बालकनी में 1,079 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था होगी. रोलर स्केटिंग रिंक की दर्शक दीर्घा में 250 लोगों के बैठने की क्षमता होगी. इसके अतिरिक्त परिसर में 250 वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी.

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य में गुणवत्ता बनाए रखने और परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए. इस परियोजना से धर्मशाला में आइस स्केटिंग और रोलर स्केटिंग जैसी खेल गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने के साथ खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है.

सात वार्डों के 7,500 परिवारों को राहत

मुख्यमंत्री ने धर्मशाला शहर के लिए 982 लाख रुपये की लागत से निर्मित अत्याधुनिक सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन संयंत्र का भी उद्घाटन किया. इस संयंत्र की निर्धारित क्षमता प्रतिदिन 60 किलोलीटर (केएलडी) है. इसके माध्यम से सीवरेज नेटवर्क से वंचित शहर के सात वार्डों को सुविधा मिलेगी और लगभग 7,500 परिवार लाभान्वित होंगे. इस परियोजना से शहर में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने और सीवरेज प्रबंधन की समस्या दूर करने में मदद मिलेगी.

डिजिटल गवर्नेंस से आम लोगों को राहत देने पर जोर

इससे पहले मुख्यमंत्री ने धर्मशाला में प्रशासनिक सुधार एवं ई-गवर्नेंस विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस का उद्देश्य केवल तकनीक का विस्तार करना नहीं, बल्कि जनसेवाओं को सरल, त्वरित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना होना चाहिए. ई-गवर्नेंस की वास्तविक सफलता इस बात में है कि इससे आम नागरिकों, विशेषकर दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का जीवन कितना आसान होता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार व्यवस्था परिवर्तन के लक्ष्य के साथ काम कर रही है. सरकार का प्रयास हिमाचल के संसाधनों का लाभ प्रदेशवासियों तक पहुंचाना और आने वाले वर्षों में राज्य को समृद्ध एवं आत्मनिर्भर बनाना है. इसके लिए डिजिटल माध्यमों से सरकारी सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि लोगों को विभिन्न कार्यों के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर न काटने पड़ें.

अधिकारियों की जवाबदेही हुई सुनिश्चित

उन्होंने कहा कि सिंगल विंडो सिटीजन पोर्टल के माध्यम से लोग घर बैठे अथवा लोक मित्र केंद्रों के जरिए विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं. मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और शिकायत निवारण पोर्टल अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बिना शिकायत को निस्तारित नहीं माना जाता. वहीं, राजस्व प्रबंधन प्रणाली और राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से इंतकाल, भूमि बंटवारे और निशानदेही से जुड़े लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाई जा रही है.

सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं?

मुख्यमंत्री ने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताएं बताते हुए कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के प्रयासों के परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में पांचवें स्थान पर पहुंचा है, जबकि वर्ष 2021 में राज्य 21वें स्थान पर था.

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए चिकित्सा संस्थानों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएं शुरू की गई हैं. पुराने चिकित्सा उपकरणों को बदलने, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने और चिकित्सा शिक्षा में स्नातकोत्तर सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए गए हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है इसलिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना सरकार की प्राथमिकता है. किसानों की आय बढ़ाने के लिए दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है. प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं 80 रुपये, कच्ची हल्दी 150 रुपये, मक्का 50 रुपये और अदरक 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जा रहा है.

उन्होंने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि निराश्रित बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाकर उनकी शिक्षा, पालन-पोषण, उच्च शिक्षा, कोचिंग, विवाह और आवास जैसी जरूरतों का ध्यान रखा जा रहा है. इसके अतिरिक्त, 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों को देश-विदेश में पढ़ाई के लिए एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है.

पहाड़ी राज्यों के हितों पर न्यायसंगत विचार करने की मांग

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के वन, नदियां और जलविद्युत संसाधन देश की पर्यावरणीय एवं ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. इसके बावजूद प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और पर्यावरण संरक्षण की लागत का असंगत बोझ पहाड़ी राज्यों को उठाना पड़ता है. उन्होंने राष्ट्रीय विकास में पहाड़ी राज्यों के योगदान का निष्पक्ष आकलन करने तथा जलविद्युत परियोजनाओं, रॉयल्टी, जल उपकर और केंद्रीय वित्तीय सहायता से जुड़े मामलों में उनके हितों पर न्यायसंगत विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया.

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हरित हिमाचल के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है और इलेक्ट्रिक बसों सहित पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न उपायों को बढ़ावा दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान होने वाले विचार-विमर्श से डिजिटल शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने और प्रौद्योगिकी का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिलेगी.

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