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सोने-चांदी के कारोबारियों को झटका, गोल्ड पर 3.1% सिल्वर पर 9% घटी ड्यूटी ड्रॉबैक रेट, अब कितना मिलेगा रिफंड? | Government Cuts Duty Drawback Rates on Gold and Silver Jewellery Exports by Up to 9 percent Check the new rates Gold Silver Price Impact



Gold & Silver Jewellery Export: ज्वैलरी एक्सपोर्टर्स के लिए एक बार फिर झटका लगा है. सरकार ने सोने और चांदी के गहनों के निर्यात पर मिलने वाले ड्यूटी ड्रॉबैक की दरें घटा दी हैं. गोल्ड ज्वैलरी पर मिलने वाला रिफंड 3.1% और चांदी के गहनों पर करीब 9% कम कर दिया गया है. जुलाई में ही सरकार ने इन दरों को लगभग दोगुना किया था, ताकि बढ़ती लागत के बीच भारतीय निर्यातकों को राहत मिल सके. अब वित्त मंत्रालय ने नई दरें जारी कर दी हैं. ऐसे में सवाल है कि सरकार ने अचानक यह कटौती क्यों की और अब एक्सपोर्टर्स को कितना रिफंड मिलेगा? 

गोल्ड-सिल्वर पर कितना घटा रिफंड?

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, सोने के गहनों के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी ड्रॉबैक रेट अब 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम से घटकर 1,794.11 रुपये प्रति ग्राम रह गई है. इस तरह इसमें करीब 3.1% की कटौती हुई है. वहीं, चांदी के गहनों और चांदी से बनी कुछ दूसरी चीजों के एक्सपोर्ट पर मिलने वाला रिफंड भी घटाया गया है. इसकी दर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम से कम होकर 26,859.02 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है. यानी चांदी के निर्यात पर मिलने वाले रिफंड में करीब 9% की कमी आई है.

जुलाई में दिया था बंपर फायदा

सरकार ने इसी साल जुलाई में चुनिंदा सोने और चांदी के गहनों के लिए ड्यूटी ड्रॉबैक की दरें लगभग दोगुनी कर दी थीं. उस समय सोने के गहनों और उनके हिस्सों पर मिलने वाला रिफंड 773.17 रुपये प्रति ग्राम से बढ़ाकर 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम किया गया था.इसी तरह, चांदी के गहनों और चांदी से बनी दूसरी चीजों पर रिफंड 14,990.66 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया था. इसका मकसद बढ़ती लागत और दुनियाभर में जारी अनिश्चितता के बीच भारतीय निर्यातकों को दूसरे देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनाए रखना था.

सरकार ने अचानक  क्यों घटाईं दरें?

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के सचिव सुरेंद्र मेहता ने इस कटौती की वजह सोने-चांदी की कीमतों में आई गिरावट को बताया है. उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी के दाम कम होने से इन पर लगने वाली वास्तविक इंपोर्ट ड्यूटी भी घट गई है. 

उन्होंने कहा कि ड्यूटी ड्रॉबैक की दरें प्रतिशत के हिसाब से तय नहीं थीं, बल्कि एक निश्चित रकम के रूप में थीं. ऐसे में सोने-चांदी की कीमतें घटने के बाद रिफंड की दरों में बदलाव करना जरूरी हो गया था.इसलिए सरकार ने रिफंड की दरों को सही करने के लिए यह कदम उठाया है.

क्या होता है ड्यूटी ड्रॉबैक?

ड्यूटी ड्रॉबैक के तहत निर्यातकों को उन इनपुट पर चुकाए गए कस्टम और एक्साइज ड्यूटी का रिफंड मिलता है, जिनका इस्तेमाल निर्यात के लिए सामान बनाने में किया जाता है. इससे प्रोडक्शन कॉस्ट का कुछ हिस्सा वापस मिल जाता है और निर्यातकों को कारोबार में मदद मिलती है.

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