

भारत ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के सैकड़ों समर्थकों को हिरासत में लिए जाने पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की ओर से जताई गई चिंता को भारत के आंतरिक मामलों में बेवजह दखल बताया है.
भारत ने X पर अपने ‘India at UN’ अकाउंट से कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि OHCHR की चिंताएं गलत हैं. भारत ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था को दुनिया के दूसरे हिस्सों में हो रहे बड़े पैमाने के विरोध-प्रदर्शनों पर ध्यान देना चाहिए.
भारत ने कहा, “भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. हमारे संविधान में लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और विरोध जताने का अधिकार दिया गया है. इस अधिकार की रक्षा मजबूत संस्थाएं, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया करते हैं. हर लोकतंत्र की तरह भारत में भी लोग सार्वजनिक व्यवस्था का ध्यान रखते हुए और तय नियमों के तहत इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं. अधिकारी कानून के मुताबिक काम करते हैं और किसी भी शिकायत के समाधान के लिए देश की अदालतें सभी के लिए खुली हैं.”
We have seen the OHCHR’s remarks about today’s events in New Delhi. India is the world’s largest democracy, where the right to peaceful assembly is guaranteed by our Constitution and safeguarded by robust institutions, an independent judiciary and a free media. As in every democracy, Indian citizens exercise this right subject to reasonable restrictions in the interest of public order. The authorities, for their part, act in accordance with the law, and our courts remain available to all for redressal of any grievances. The OHCHR’s concerns are therefore misplaced and constitute an unwarranted interference in the internal affairs of India. In this context, OHCHR would also do well to devote comparable attention to large-scale protests elsewhere, consistent with its mandate of impartiality and non-selectivity. @MEAIndia @IndianDiplomacy @PMOIndia @DrSJaishankar @abagchimea
— India at UN, Geneva (@IndiaUNGeneva) October 10, 2026
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने शनिवार को दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान लोगों को बड़ी संख्या में हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई थी. साथ ही, उसने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के अधिकार का सम्मान करने और बिना किसी ठोस वजह के हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा करने की अपील की.
दरअसल, आज सुरक्षा बलों ने कॉकरोच जनता पार्टी के पहले से तय प्रदर्शन को मध्य दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोक दिया. इन लोगों को पुलिस ने प्रदर्शन की इजाजत नहीं थी, मगर इसके बाद भी सैकड़ों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर पहुंचने की कोशिश करने लगे. तब दिल्ली पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया.
शनिवार को एक बयान में, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता थमीन अल-खीतान ने कहा कि कार्यालय “दिल्ली में आज हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान प्रदर्शनकारियों, प्रदर्शन के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को भारत में बड़ी संख्या में हिरासत में लिए जाने की खबरों से चिंतित है. हम अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के अधिकार का पूरा सम्मान करें और उसे सुनिश्चित करें. शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों पर लगाई जाने वाली पाबंदियां जरूरत और आनुपातिकता की कड़ी कसौटी पर खरी उतरनी चाहिए.”
अल-खीतान ने भारतीय अधिकारियों से यह भी कहा कि वे सुनिश्चित करें कि कानून लागू करने वाले अधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ निपटने में “बेहद संयम” बरतें, जो देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और मानवाधिकारों से जुड़ी जिम्मेदारियों के अनुरूप हो. उन्होंने कहा, “जिन लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत और बिना किसी शर्त के रिहा किया जाना चाहिए.” संयुक्त राष्ट्र ने अधिकारियों से यह भी आग्रह किया कि वे “सामने आई व्यापक चिंताओं को दूर करने के लिए सार्थक बातचीत करें.”
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