

मशहूर एक्टर नाना पाटेकर, जिन्होंने बॉलीवुड में अपनी तेज और दमदार भूमिकाओं से पहचान बनाई, हमेशा खुद को फिल्मी दुनिया से अलग बताते रहे. उन्होंने कहा था कि वे गांव के आदमी हैं और हमेशा रहेंगे. पुणे के पास डोंजे में अपने फार्म हाउस में वे ज्यादातर समय पहाड़ों, खेतों, जानवरों और किताबों के बीच बिताते थे. 2024 में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में अमिताभ बच्चन से बातचीत में नाना पाटेकर ने अपने फार्म हाउस की दिनचर्या बताई.
एसी के बिना रहते
सुबह दो घंटे जिम में कसरत, फिर खेतों का जायजा, खुद नाश्ता और दोपहर का खाना बनाना. वे अच्छे रसोइया थे. शाम को किताबें पढ़ते, एसी के बिना रहते और आसपास के नजारे का आनंद लेते. सुबह मोरों की आवाज से उनकी नींद खुलती. कभी-कभी 25-30 मोर आ जाते. वे कहते थे, ‘यहां इतनी शांति है, जिंदगी कितनी सरल है.’
उन्होंने कहा, ‘मैं फिल्म इंडस्ट्री का नहीं हूं. यहां काम करके चला जाता हूं. पार्टियों में कभी नहीं गया. मैं गांव का आदमी हूं. वहां मुझे अपना बचपन मिल जाता है.’ जीवन से उन्हें जरूरत से ज्यादा मिला. जरूरतें कम रखने से जिंदगी आसान हो जाती है. उन्होंने अमिताभ बच्चन को गांव में एक हफ्ता बिताने और नाम फाउंडेशन से जुड़ने का निमंत्रण भी दिया था.
सिनेमा पोस्टर पेंट करते थे नाना
नाना पाटेकर ने अपनी गरीबी के दिनों को भी याद किया. जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स में पढ़ाई के दौरान सरकारी पोस्टर बनाते थे. जेब्रा क्रॉसिंग पेंट करने का काम भी मिला, जिसमें 15 रुपये मिलते. नौवीं कक्षा में पिता का कारोबार बिगड़ने के बाद स्कूल के साथ काम शुरू किया. सिनेमा पोस्टर पेंट करने के लिए रोज 8-8 किलोमीटर पैदल जाते. महीने के 35 रुपये और एक वक्त का खाना मिलता. जेब खर्च सिर्फ 25 पैसे था. अखबार में लपेटी रोटी, 15 पैसे की उसल और 10 पैसे के दो केले से काम चलाते.
नाना पाटेकर की फिल्में
शाम को खाना खाते हुए सोचते कि मां ने खाया या नहीं, लेकिन भूख इतनी थी कि पहले खुद खा लेते. इन दिनों ने उन्हें बहुत सिखाया. बाद में जब ‘अंकुश’ फिल्म के पोस्टर हर खंभे पर दिखे तो उन्हें बहुत अच्छा लगा.
तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नाना पाटेकर ने ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘अग्नि साक्षी’ जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं. 2013 में पद्मश्री मिला. वे हमेशा सादगी भरे जीवन को प्राथमिकता देते रहे.
यह भी पढ़ें | इस फिल्म के लिए सचमुच आग में जल गए थे नाना पाटेकर, 60 दिन तक अस्पताल में रहे थे भर्ती





