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खुली जीप में सैर, हिम तेंदुओं को देखने का रोमांच, लद्दाख में खुली देश की सबसे ऊंची वाइल्ड लाइफ सफारी | India first high-altitude wildlife safari launched in Ladakh Explore Snow Leopard natural habitat in an open-back jeep


लद्दाख में वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक रोमांचक पहल की शुरुआत हुई है. प्रशासन ने लद्दाख में भारत की पहली सबसे ऊंचाई वाली वन्यजीव सफारी की शुरुआत की है, जिसके तहत छह विशेष रूप से डिजाइन की गई ओपन-बैक जीप सफारी गाड़ियों को सफर के लिए उतारा गया है. शुरुआती चरण में यह सफारी रुंबक (Rumbak), शांग (Shang) और उले (Uley) क्षेत्रों में पर्यटकों को हिम तेंदुए (Snow Leopard) के प्राकृतिक आवास तक ले जाएगी.

कहां और कैसे होगी सफारी?

पर्यटकों के लिए रहस्यमयी ‘घोस्ट ऑफ द माउंटेंस’ कहे जाने वाले हिम तेंदुए की तलाश के लिए रुंबक, शांग और उले इलाकों में ले जाया जाएगा. हेमिस नेशनल पार्क के पास स्थित रुंबक और शाम क्षेत्र का उले पहले से ही विंटर स्नो लेपर्ड ट्रैकिंग के लिए मशहूर केंद्र रहे हैं. पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा के लिए छह ओपन-बैक जीप सफारी गाड़ी तैनात किए गए हैं. इन गाड़ियों के साथ प्रशिक्षित स्थानीय ड्राइवर और वाइल्डलाइफ गाइड भी मौजूद रहेंगे. संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों में बेरोकटोक घूमने के बजाय ये वाहन केवल निर्धारित रास्तों पर ही चलेंगे.

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देश में सबसे ज्यादा लद्दाख में हिम तेंदुए

लद्दाख की भौगोलिक स्थिति और ठंडक हिम तेंदुए के लिए सबसे अनुकूल मानी जाती है. भारत की पहली ‘स्नो लेपर्ड पॉपुलेशन असेसमेंट’ रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे देश में अनुमानित 718 हिम तेंदुए हैं, जिनमें अकेले लद्दाख में 477 और दूसरे स्थान पर उत्तराखंड में 124 हिम तेंदुए मौजूद हैं. इसका मतलब यह है कि देश के लगभग दो-तिहाई (करीब 65 प्रतिशत) हिम तेंदुए लद्दाख में ही पाए जाते हैं. इसके अलावा, इस हाई-अल्टीट्यूड क्षेत्र में ब्लू शीप  जिसे भारल भी कहा जाता है, आइबेक्स और अन्य दुर्लभ हिमालयी वन्यजीव भी देखने को मिलते हैं.

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विस्तार और पर्यावरण संरक्षण का संतुलन

प्रशासन इस प्रोजेक्ट को हेमिस नेशनल पार्क, चांगथांग, काराकोरम वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, नुबरा, जांस्कर, शाम, कारगिल और द्रास जैसे अन्य क्षेत्रों तक भी बढ़ाने पर विचार कर रहा है. हालांकि, पर्यावरणविदों ने संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पर पर्यटन के बढ़ते दबाव को लेकर चिंता भी जताई है. इसे ध्यान में रखते हुए, सफारी को पूरी तरह रेगुलेटेड रखा गया है ताकि अवैध ऑफ-रोडिंग पर रोक लग सके और वन्यजीवों को कम से कम परेशानी हो.

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण को स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ना है. स्थानीय निवासियों को ड्राइवर, वाइल्डलाइफ गाइड और नेचर इंटरप्रेटर के रूप में रोजगार दिया जा रहा है. साथ ही, स्थानीय युवाओं को पक्षी पहचान (Bird Identification) का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है.

फिलहाल यह सफारी सीमित स्तर पर शुरू की गई है, और इसके किराए, बुकिंग प्रक्रिया तथा दैनिक समय-सारणी की आधिकारिक घोषणा जल्द ही की जाएगी. हालांकि मुश्किल से दिखने वाले हिम तेंदुए की एक झलक पाने के लिए पर्यटकों को अब भी भारी धैर्य रखना होगा.

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