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बॉलीवुड के वो 2 सितारे जो सुपरहिट फिल्म में एक साथ आए नजर, 8 अक्तूबर को एक हुआ जन्म, दूसरे का निधन | Two Bollywood stars did a superhit film one was born on October 8 while the other passed away on the same date



नई दिल्ली:

राज कुमार की क्लासिक फिल्मों की बात हो तो तिरंगा का जिक्र जरूर आता है. वहीं अगर नाना पाटेकर की यादगार फिल्मों की बात निकले तो तिरंगा के बिना लिस्ट अधूरी होगी. ये दोनों ऊम्दा कलाकार इस फिल्म में साथ नजर आए थे. 1993 में आई ये फिल्म एक एक्शन थ्रिलर थी. ब्रिगेडियर सूर्यदेव सिंह और पुलिस इंस्पेक्टर शिवाजीराव वाघले की जोड़ी और जुगलबंदी ने मिलकर प्रलयंत को मारने के लिए ऐसे जाल बिछाए और ऐसी तिकड़म लगाई कि ये फिल्म के हाई पॉइंट रहे. 

मेहुल कुमार के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म लंबे समय तक स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर दूरदर्शन पर आती थी. यही वजह है कि 90 के दशक का शायद ही कोई ऐसा बच्चा हो जिसने ये फिल्म ना देखी हो. इस फिल्म की कास्टिंग कमाल थी और गजब संयोग देखिए कि 8 अक्तूबर का दिन इस फिल्म के इतिहास से कुछ और गहराई से जुड़ गया. एक तरफ जहां एक तरफ 8 अक्तूबर को ब्रिगेडियर सूर्यदेव सिंह यानी कि एक्टर राज कुमार का बर्थडे होता था. वहीं दूसरी तरफ शिवाजीराव वाघले यानी कि नाना पाटेकर ने आज के दिन इस दुनिया को अलविदा कहा. 

तिरंगा की कहानी

फिल्म की शुरुआत प्रलयनाथ गैंडास्वामी के तीन न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स को किडनैप करने से होती है. वह भारत पर हमले के लिए न्यूक्लियर मिसाइलें बनाना चाहता है. इसी बीच प्रलयनाथ गुंडास्वामी एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर, डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल रुद्रप्रताप चौहान की हत्या कर देता है, क्योंकि वह उसकी हिटलिस्ट में थे. रुद्रप्रताप का बेटा, संजय, उनकी हत्या का एकमात्र गवाह है. जब साइंटिस्ट्स का पता नहीं चलता, तो पुलिस ब्रिगेडियर सूर्यदेव सिंह को मामले की जिम्मेदारी संभालने के लिए बुलाती है. 

सूर्यदेव, ईमानदार लेकिन गुस्सैल पुलिस इंस्पेक्टर शिवाजीराव वाघले के साथ मिलकर काम करते हैं, जिन्हें अपने गुस्से की वजह से काफी समय तक सस्पेंशन झेलना पड़ा था. जब केंद्रीय मंत्री जीवनलाल टंडेल, जो प्रलयनाथ गैंडास्वामी का साथी है, सूर्यदेव सिंह के बारे में बताने के लिए उससे मीटिंग करता है, तो प्रलयनाथ गैंडास्वामी सवाल करता है कि उसके बारे में इतनी बातें तो पता हैं, लेकिन उसकी एक भी फोटो क्यों नहीं है. उसी समय, सूर्यदेव सिंह ऑडिटोरियम में आते हैं और बताते हैं कि वही वह व्यक्ति हैं जिनका चेहरा देखने के लिए प्रलयनाथ गैंडास्वामी इतने बेताब थे. कहानी आगे बढ़ती है राज कुमार और नाना पाटेकर मिलकर गैंडास्वामी को सबक सिखाते हैं. बात करें इस फिल्म की बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की तो ये उस वक्त की सुपर हिट फिल्म थी. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 12.5 करोड़ की कलेक्शन की थी.  
 




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