

1686 दिन, 6.5 लाख सैनिकों की मौत, 16 हजार से अधिक नागरिक मौत के मुंह में समाएं… रूस यूक्रेन जंग के यह आंकड़े दिलों को दहलाने के लिए काफी हैं. ऐसे में भारत ने अब दुनिया से कह दिया है कि बहुत हो गई जंग. भारत ने दोनों मुल्कों के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए तीन पार्ट वाला एक शांति प्रस्ताव पेश किया है. भारत इस संघर्ष को सुलझाने में बड़ी भूमिका निभाना चाहता है. भारत की इस पहल की जानकारी रखने वाले लोगों ने NDTV को बताया कि युद्धविराम के इस प्रस्ताव में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और काला सागर से होने वाली कमर्शियल शिपिंग भी शामिल है.
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने NDTV को बताया कि नई दिल्ली ने पिछले महीने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की कीव यात्रा के दौरान यूक्रेन को यह शांति प्रस्ताव सौंपा था. यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने पुष्टि की कि उनकी सरकार को नई दिल्ली से ऐसा प्रस्ताव मिला है. उन्होंने इसे रूस के साथ युद्ध खत्म करने के मकसद से शुरू की गई चार अंतरराष्ट्रीय पहलों में सबसे व्यापक बताया है. यूक्रेन को तुर्की, मिस्र और अमेरिका से भी युद्धविराम के संभावित प्रस्ताव मिले हैं.
उनके ये बयान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस बयान के बाद आए हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास यूक्रेन के साथ युद्ध खत्म करने के लिए “आपसी सहमति वाले… समाधान खोजने के बेहतरीन विचार” हैं. उन्होंने संघर्ष को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध रहते हुए तटस्थ रुख बनाए रखने के लिए पीएम मोदी की तारीफ भी की.
भारत के प्रस्ताव की मुख्य बातें
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, भारत की 3 पार्ट वाली युद्धविराम योजना का मकसद एनर्जी सुविधाओं और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों को रोकना, काला सागर के बंदरगाहों से अनाज और एनर्जी की सप्लाई जारी रखना और इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर हमलों को खत्म करना है. भारत का प्रस्ताव मिस्र और तुर्की के प्रस्तावों से अलग है.
मिस्र और तुर्की के प्रस्ताव मुख्य रूप से कमर्शियल जहाजों पर हमलों को रोककर काला सागर से अनाज की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं. वहीं, दूसरी ओर अमेरिका का प्रस्ताव एनर्जी युद्धविराम पर केंद्रित है.
भारत का रुख क्या रहा है?
इस हफ्ते की शुरुआत में, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत सिर्फ वकालत करने से आगे बढ़ चुका है और तनाव कम करने के लिए मॉस्को और कीव दोनों के साथ व्यावहारिक बातचीत कर रहा है. दिल्ली में म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, विदेश मंत्री ने कहा कि नई दिल्ली ने हाल के महीनों में मॉस्को और कीव दोनों के साथ बातचीत की है, जिसमें काला सागर में जहाजों की सुरक्षा से लेकर एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों को रोकने तक के प्रस्तावों पर चर्चा की गई है.
भारत ने युद्ध पर तटस्थ रुख बनाए रखा है और लड़ाई रोकने की अपील की है, लेकिन रूस के साथ अपने करीबी रक्षा और द्विपक्षीय संबंधों के कारण उसने रूस की सीधे तौर पर आलोचना करने से परहेज किया है.
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