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54 साल पुराना वो गाना जो हावड़ा ब्रिज या हुगली नदी नहीं स्टू़डियो के बदबूदार पानी में हुआ शूट, राजेश-शर्मिला की दिलकश केमेस्ट्री, किशोर की एवरग्रीन वॉयस | 54 year old song chingari koi bhadke shot in smelly studio water not howrah bridge rajesh sharmila chemistry kishore kumar evergreen voice



साल 1972 में आई फिल्म ‘अमर प्रेम’ का गाना ‘चिंगारी कोई भड़के’ आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार गीतों में गिना जाता है. किशोर कुमार की दर्दभरी आवाज, आनंद बख्शी के भावुक बोल और आर.डी. बर्मन का संगीत इस गाने को अलग ही एहसास देते हैं. स्क्रीन पर राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर नाव पर बैठे नजर आते हैं और पीछे हावड़ा ब्रिज और हुगली नदी का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है. इसे देखकर शायद ही किसी को अंदाजा हो कि गाने के कई अहम हिस्से असली नदी में नहीं, बल्कि मुंबई के स्टूडियो में बनाए गए पानी के सेट पर फिल्माए गए थे. 

हावड़ा ब्रिज का खूबसूरत नजारा

‘चिंगारी कोई भड़के’ को देखकर लगता है कि राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर के सारे सीन हुगली नदी में ही फिल्माए गए होंगे. राजेश खन्ना नाव पर बैठे हैं, शर्मिला टैगोर उनके साथ हैं और पीछे हावड़ा ब्रिज दिखाई देता है. लेकिन असल कहानी थोड़ी अलग है.

शर्मिला टैगोर ने एक इंटरव्यू में खुद इस बात का खुलासा किया था. उन्होंने बताया था कि गाने के वाइड और लॉन्ग शॉट्स असली लोकेशन पर लिए गए थे, जिनमें हावड़ा ब्रिज और हुगली नदी साफ नजर आती है. लेकिन क्लोज और मिड शॉट्स के लिए फिल्म की टीम को स्टूडियो का सहारा लेना पड़ा. दरअसल, कोलकाता में हावड़ा ब्रिज के नीचे शूटिंग की अनुमति नहीं मिल पाई थी. ऐसे में मेकर्स ने मुंबई के नटराज स्टूडियो में ही पानी का बड़ा सेट तैयार कर लिया. 

स्टूडियो में भरा था पानी, कई दिनों में आने लगी बदबू

सबसे दिलचस्प बात इस गाने की शूटिंग के पानी को लेकर है. नदी जैसा माहौल बनाने के लिए स्टूडियो में एक टैंक में पानी भर दिया गया था. उसमें नाव रखी गई, ताकि राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर बिल्कुल उसी तरह नजर आएं जैसे वे नदी में नाव पर बैठे हों.

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लेकिन शूटिंग एक-दो दिन में खत्म नहीं हुई. शर्मिला टैगोर ने बाद में इस अनुभव को याद करते हुए बताया था कि गाने की शूटिंग कई दिनों तक चली. पानी लगातार वहीं भरा रहा और धीरे-धीरे उसमें चिकनाई और बदबू आने लगी. यानी पर्दे पर जिस पानी को देखकर दर्शकों को रोमांटिक और खूबसूरत माहौल महसूस होता है, उसके पीछे कलाकारों को काफी असहज परिस्थितियों में शूट करना पड़ा था. 

राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर को उसी नाव पर बैठकर रोमांटिक और भावुक एक्सप्रेशन देने थे. बदबूदार पानी के बीच भी दोनों ने अपने किरदार और गाने की भावनाओं को कम नहीं होने दिया. शायद यही वजह है कि स्क्रीन पर उनकी केमेस्ट्री इतनी सहज दिखाई देती है.

किशोर कुमार की आवाज ने दर्द को दे दी अलग पहचान

‘चिंगारी कोई भड़के’ सिर्फ अपनी पिक्चराइजेशन की वजह से यादगार नहीं हुआ. इस गाने की सबसे बड़ी ताकत इसकी आवाज और बोल भी हैं. इसे किशोर कुमार ने गाया, आनंद बख्शी ने लिखा और आर.डी. बर्मन ने संगीत दिया था. 

गाने के बोल जिंदगी, रिश्तों और टूटे हुए सपनों के दर्द को बेहद सरल तरीके से सामने रखते हैं. यही वजह है कि यह सिर्फ एक फिल्मी रोमांटिक गीत बनकर नहीं रह गया. राजेश खन्ना की आंखों में दिखाई देता दर्द, शर्मिला टैगोर के भावुक एक्सप्रेशन और किशोर कुमार की आवाज मिलकर इसे ऐसा गीत बना देते हैं जिसे पांच दशक से ज्यादा समय बाद भी लोग उसी भाव के साथ सुनते हैं.

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54 साल बाद भी ‘चिंगारी कोई भड़के’ यह याद दिलाता है कि पर्दे पर दिखने वाली खूबसूरती के पीछे कलाकारों की मेहनत और कई बार ऐसी मुश्किलें छिपी होती हैं, जिनका दर्शक अंदाजा भी नहीं लगा पाता.





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