
नई दिल्ली:
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के विरोध में विपक्षी गठबंधन इंडिया ने मार्च निकाला. कांग्रेस, सपा, एनपीसी, तृणमूल कांग्रेस समेत 19 दलों के सांसद चुनाव आयोग के कार्यालय का घेराव निकले और रास्ते में रोके जाने पर धरने पर बैठ गए. सपा सांसद अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी इन धरनारत सांसदों की अगुवाई करती दिखीं. अखिलेश ने कहा कि बीजेपी चुनाव में घपला कर रही है. जनता इनका इलाज करेगी. बीजेपी के लोग झूठ बोलते हैं. ये अपनी विचारधारा को थोप रहे हैं, देश में लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं. अगर आप भाजपा के वोटर हैं तो वोटर हैं, लेकिन बीजेपी के साथ नहीं हैं तो वोट नहीं. चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है. पीडीए के लोग लोकतंत्र को बचाने के लिए आगे आएंगे.
वोट काटा जा रहा था और फॉर्म 7 के जरिये घपलेबाजी की जा रही थी. बीजेपी एक तरह से बेईमानी करती है. वोट काटे जाते हैं. पैसे का इस्तेमाल किया जाता है. अपनी विचारधारा के लोग चुनाव के दौरान सुरक्षा में लगाए जाते हैं. वन नेशन वन इलेक्शन ये लोग इसीलिए चाहते हैं कि एक बार घपला कर चुनाव लूट लिया जाए. चुनाव आयोग ने पीडीए के लोगों के साथ भेदभाव किया है.

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा, ज्ञानेश कुमार पर तो हमें कभी भरोसा नहीं था लेकिन अब यकीन में बदल गया है कि वे भरोसे के लायक आदमी नहीं हैं. विरोध मार्च के दौरान सांसदों ने वोट चोर, गद्दी छोड़ के नारे लगाए.सपा सांसद इकरा हसन ने कहा, विपक्ष पहले दिन से कह रहा है कि ज्ञानेश कुमार भाजपा एजेंट की तरह काम कर रहे हैं. सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि पहले भी चुनाव आयोग पर आरोप लगे हैं. चुनाव आयोग ने 2017, 2019, 2022, 2024 में बेईमानी की और बंगाल में खेला किया. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और NCP(SP) सांसद सुप्रिया सुले और INDIA ब्लॉक के कई महिला सांसद भी मार्च में शामिल रहीं.
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कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि ये पता चल गया कि ये चोरी की सरकार है. चोरी की सरकार को कोई नैतिकता नहीं है. ये सरकार बर्खास्त हो और फिर से लोकसभा चुनाव हों. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, हम अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं. सरकार आजादी के बाद मिले मताधिकार को खत्म करने की कोशिश कर रही है. CEC ज्ञानेश कुमार सरकार की कठपुतली हैं. RJD सांसद मनोज झा ने कहा, कोशिश तो करेंगे लेकिन अगर अहंकार इस स्तर पर है तो वो डर का भी संकेत है. समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान बर्क अपने साथी सांसदों के साथ चुनाव आयोग जाते समय नीति आयोग के दफ्तर के पास लगे पुलिस बैरिकेड पर चढ़ गए.





