
एक मां जिसके पेट में नन्हीं सी जान पल रही हो, उसे अचानक डॉक्टर कहें कि आपका बच्चा दुनिया में नहीं आ पाएगा. और अगर आ भी गया, तो वो सिर्फ बेतहाशा दर्द और तकलीफ में जिएगा. किसी भी मां के लिए इससे बड़ा वज्रपात भला क्या होगा? 27 साल की क्लोई रूकर के पैरों तले भी उस वक्त जमीन खिसक गई थी, जब डॉक्टरों ने उनकी होने वाली बेटी डेजी को लेकर यही खौफनाक चेतावनी दी थी. डॉक्टरों ने तो यहां तक कह दिया था कि अब इस प्रेग्नेंसी को खत्म कर देना ही बेहतर है. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. जब सारी उम्मीदें टूट चुकी थीं, तब गर्भ में पल रही उस नन्हीं सी जान ने अपनी मां को एक ऐसा इशारा दिया, जिसने विज्ञान को भी हैरान कर दिया.
खुशियों के बीच डॉक्टरों ने दी बुरी खबर
साल 2022 की बात है. क्लोई को पता चला कि उनके घर एक बेटी होने वाली है. उन्होंने बड़े प्यार से उसका नाम रखा ‘डेज़ी’. सब कुछ बेहद खूबसूरत चल रहा था. लेकिन जैसे ही प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते का ‘अनोमली स्कैन’ हुआ, डॉक्टरों के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं. नन्हीं डेजी के दिमाग का विकास ठीक से नहीं हो रहा था.
क्लोई को तुरंत बड़े डॉक्टरों के पास रेफर किया गया. वहां जांच में पता चला कि बच्ची के दिमाग में असामान्य रूप से पानी भर रहा है, जिसे मेडिकल की भाषा में ‘वेंट्रिकुलोमेगाली’ कहते हैं. इसके साथ ही उसकी किडनी में भी समस्या थी. डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि बच्ची का बचना नामुमकिन सा है. इस कड़वे सच ने क्लोई को भीतर से सुन्न कर दिया. वो गहरे सदमे में चली गईं. उन्होंने लोगों से बात करना बंद कर दिया और खुद को बिल्कुल अकेला कर लिया.
स्क्रीन पर दिखा चमत्कार
इसके बाद के 15 हफ्ते क्लोई के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं थे. हर दो हफ्ते में अस्पताल के चक्कर, एमआरआई और स्कैन. दर्द और डर का ऐसा दौर, जहां हर पल सांसें अटकी रहती थीं. लेकिन इसी बीच एक ऐसी घटना घटी, जिसने इस उदास कहानी में उम्मीद की एक नई रोशनी भर दी.
एक दिन जब क्लोई अपने रूटीन स्कैन के लिए जा रही थीं, तो उन्होंने रोते हुए अपने पेट पर हाथ रखा और बुदबुदाईं “डेजी, आज डॉक्टरों को बता दो कि तुम बिल्कुल ठीक हो. उनसे कहो कि वो फालतू की चिंता छोड़ें.”
इसके बाद जब स्कैन शुरू हुआ, तो जो कुछ भी मॉनिटर पर दिखा, उसे देखकर डॉक्टर अपनी हंसी नहीं रोक पाए और क्लोई की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े. स्क्रीन पर नन्हीं डेजी अपनी मुट्ठी बंद किए, डॉक्टरों को साफ तौर पर ‘थम्स अप’ यानी अंगूठा दिखाकर ऑल द बेस्ट कह रही थी. यह सिर्फ एक इशारा नहीं था, बल्कि उस नन्हीं जान का अपनी मां से किया गया वादा था कि “मां, डरो मत, मैं आ रही हूं और बिल्कुल ठीक हूं.”
विज्ञान हारा, ममता जीती
चमत्कार सिर्फ उस इशारे तक सीमित नहीं था. जब डेजी का जन्म हुआ, तो डॉक्टरों की पूरी टीम मुस्तैद थी कि एक बहुत बीमार बच्ची पैदा होने वाली है. जन्म के तुरंत बाद डेजी के दिमाग का अल्ट्रासाउंड किया गया. लेकिन रिपोर्ट देखकर बाल रोग विशेषज्ञों की आंखें फटी की फटी रह गईं.
डेजी के दिमाग में भरा वो पानी अपने आप पूरी तरह गायब हो चुका था. उसकी बीमारी खुद-ब-खुद ठीक हो गई थी. हैरान-परेशान डॉक्टरों ने क्लोई से पूछा- “क्या हमने सचमुच सही बच्चे का स्कैन किया है?” यह किसी मेडिकल मिरेकल से कम नहीं था. जहां विज्ञान ने हाथ खड़े कर दिए थे, वहां एक मां की दुआ और बच्चे की जीने की जिद जीत चुकी थी.
गर्त से निकलकर दूसरों का संबल बनी क्लोई
आज डेजी पूरे तीन साल की हो चुकी है. वह बिल्कुल स्वस्थ है. क्लोई कहती हैं कि वह आज भी हर दिन थोड़ा डरती हैं कि कहीं कोई परेशानी दोबारा न आ जाए, लेकिन अपनी “बिल्कुल परफेक्ट” बेटी को देखकर उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है.
इस मुश्किल दौर ने क्लोई को भीतर से बेहद मजबूत बना दिया है. वह अपनी इस दर्दनाक याद को सिर्फ एक कड़वा अनुभव बनाकर नहीं रखना चाहती थीं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर @cr_share नाम से एक कम्युनिटी बनाई है, जहां वह उन माताओं की मदद करती हैं जो अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसे ही किसी मानसिक या शारीरिक तनाव से गुजर रही हैं. इतना ही नहीं, वह हाफ मैराथन में हिस्सा ले रही हैं और साल 2027 में उन माता-पिता के लिए फंड जुटाने के लिए ‘स्काई डाइव’ करने वाली हैं जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया है.
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