

नई दिल्ली:
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के चुनाव परिणामों में Gen-Z ने फिर अपना अलग रुख दिखाया है. क्योंकि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद इस बार का DUSU चुनाव केवल छात्र राजनीति का मुकाबला नहीं था, बल्कि इसे देश के छात्र युवाओं और GEN-Z के मूड का लिटमस टेस्ट माना जा रहा था. लेकिन जो नतीजे आए हैं, उनमें कई बड़े संदेश छिपे हैं. यह नतीजे एक तरफ विपक्ष की छात्र राजनीति को बड़ा झटके के तौर पर देखे जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के लिए भी यह नतीजे अहम है, ऐसा इसलिए क्योंकि खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से लेकर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने जीतने वाले छात्रों को बधाई दी है. वहीं निर्दलीय दीपांशु शौकीन की जीत भी बड़ा मैसेज लेकर आई है. जिसने यह तय कर दिया है कि छात्र उसे ही वोट देंगे जो उन्हें सही लगेगा.
क्यों खास था इस बार DUSU का चुनाव
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में इस बार ABVP को अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद पर जीत मिली है, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन जीते हैं. NSUI के खाते में इस बार कोई पद नहीं आया है. दरअसल, डूसू चुनाव 2026 को इस नजरिए से देखा जा रहा था कि देश का युवा हालिया परीक्षा विवादों, नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शनों और सत्य निकेतन जैसी घटनाओं के बाद किस तरह का रुख दिखाता है. जंतर-मंतर पर हुए हालिया छात्र आंदोलनों के बाद एबीवीपी की राह आसान नहीं थी, जबकि इस बार NSUI ने भी पूरा दम लगाया था. लेकिन नतीजों में एबीवीपी अपनी सीटें बरकरार रखने में कामयाब रही. ABVP के यश डबास अध्यक्ष बने हैं, वहीं रिया छावड़ी को सचिव और लक्ष्यराज सिंह को संयुक्त सचिव पद पर जीत मिली. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नतीजों ने यह तय किया है कि बाहर से बने नेरेटिव से Gen-Z वोट नहीं करता, वह अपने विवेक के आधार पर ही वोटिंग करता है.
ये भी पढे़ंः DUSU क्यों कहलाता है राजनीति की नर्सरी? अरुण जेटली, रेखा गुप्ता समेत कौन-कौन से दिग्गज यहां से निकले
अमित शाह, नितिन नवीन ने दी बधाई
परिणाम आते ही बीजेपी के बडे़ नेताओं ने ABVP के जीतने वाले नेताओं को बधाई. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लिखा ‘दिल्ली विश्वविद्यालय केवल एक यूनिवर्सिटी नहीं, यहां देश के हर कोने से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं. यहां का जनादेश पूरे भारत के युवाओं के मन का प्रतिबिंब होता है. आज ABVP को को मिली शानदार जीत उन राष्ट्र विरोधी ताकतों के लिए स्पष्ट संदेश है, जो युवा शक्ति को राष्ट्रविरोधी एजेंडे की प्रयोगशाला बनाना चाहते हैं. देश का युवा आज राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के साथ मजबूती से खड़ा है और यही इस जनादेश का सबसे बड़ा संदेश है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी जीत की बधाई देते हुए इसे Gen-Z का नया मूड बताया.
क्या विपक्ष की राजनीति को बड़ा झटका
यह परिणाम कांग्रेस और पूरे विपक्ष के लिए एक झटके के तौर पर देखे जा रहे हैं. क्योंकि कांग्रेस समर्थित NSUI पूरी तरह से चुनाव में फैल नजर आई. पार्टी के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी भी लगातार युवाओं के मुद्दों को उठा रहे हैं, लेकिन जिस तरह से नतीजे आए उसने कांग्रेस और NSUI को झटका दिया है. जबकि NSUI की तरफ से आखिरी वक्त में टिकट कटने वाले दीपांशु शौकीन का निर्दलीय जीतना भी एक बड़ा संदेश है कि पार्टी के छात्र संगठन में भी एकजुटता की कमी है. टिकट वितरण में आंतरिक कलह इसका सबसे बड़ा सबूत बनी. पूर्व एनएसयूआई सदस्य दीपांशु शौकीन को टिकट न देना संगठन की बड़ी भूल साबित हुई, जिन्होंने निर्दलीय लड़कर उपाध्यक्ष पद पर 30,615 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की. यह परिणाम साफ दिखाता है कि विपक्ष युवाओं के गुस्से को संगठित वोट में बदलने में नाकाम रहा है.
छात्रों ने छात्र संगठनों को नोटा की चोट भी दी है
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के नतीजों में जहां एक तरफ युवाओं ने एबीवीपी के पक्ष में मतदान कर उस पर अपना गहरा विश्वास जताया, वहीं दूसरी तरफ नोटा को मिले भारी-भरकम वोटों ने छात्र राजनीति के प्रति नाराजगी को भी उजागर किया है. इस चुनाव में अध्यक्ष पद पर 4,310, उपाध्यक्ष पद पर 4,359, सचिव पद पर 7,884 और सह-सचिव पद पर 7,389 छात्रों ने नोटा का विकल्प चुना. चारों केंद्रीय पदों को मिलाकर कुल 23 हजार 942 बटन नोटा के पक्ष में दबाए गए. जो यह साफ दर्शाता है कि कैंपस का एक बड़ा वर्ग दोनों प्रमुख छात्र दलों की पारंपरिक राजनीति से असंतुष्ट है. एबीवीपी की शानदार जीत के साथ-साथ नोटा के पक्ष में पड़े ये हजारों वोट दोनों बड़े छात्र संगठनों के लिए एक कड़ा संदेश हैं कि छात्रों का एक वर्ग मुख्यधारा की राजनीति से अलग विकल्प की तलाश में है.
Gen-Z का इस चुनाव में क्या दिखा असर?
इस चुनाव में Gen-Z का सबसे ज्यादा असर दिखा. युवाओं पारंपरिक वोटिंग पैटर्न को पूरी तरह नकार दिया. इस युवा पीढ़ी को सोशल मीडिया रील्स, मीम्स और एआई-संचालित कैंपेन से प्रभावित करने की कोशिश तो दोनों तरफ से हुई, लेकिन जेन-जी ने बेहद परिपक्वता दिखाई है. नतीजे तो लगभग यही कहते हैं. चुनाव जीतने के बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष यश डबास ने कहा कि वह जेन-जी देश के साथ है. यानि केवल वादों से कुछ नहीं होगा. Gen-Z अपने स्तर पर वोटिंग का मतलब भी जानता है. जिसका असर आने वाले चुनावों में भी दिखने वाला है. डूसू चुनाव 2026 के नतीजों ने साफ कर दिया है कि युवा वोटर अब केवल नारों से नहीं प्रभावित होता, बल्कि प्रभाव होना सबसे ज्यादा जरूरी है.
ये भी पढ़ेंः DUSU में ABVP की 3-1 की तस्वीर, जीत के बाद हॉस्टल-PG से लेकर प्लेसमेंट तक का एजेंडा क्या?





