

मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर हमले किए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है. अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान में कई ठिकानों को निशाना बनाकर “आत्मरक्षा में हमले” शुरू किए गए हैं. अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की लगातार और अनुचित आक्रामक गतिविधियों के जवाब में की गई है. इन हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास विस्फोटों की खबरें सामने आईं. ईरानी मीडिया के अनुसार दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास, केश्म द्वीप, मीनाब और सीरिक शहरों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं.
U.S. Central Command forces began launching additional self-defense strikes today at 5:15 p.m. ET against multiple targets in Iran at the Commander in Chief’s direction. The strikes are in response to Iran’s unwarranted and continued aggression.
— U.S. Central Command (@CENTCOM) June 10, 2026
ईरान ने होर्मुज किया बंद, अमेरिका सेना ने नकारा
द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार ईरान की टॉप ज्वाइंट मिलिट्री कमांड ने कहा है कि उसने होर्मुज को बंद कर दिया है और अब किसी भी जहाज के गुजरने की इजाजत नहीं होगी. साफ- साफ कहा गया कि जो भी जहाज वहां से गुजरने की कोशिश करेगा, उसे निशाना बनाया जाएगा. हालांकि US सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह झूठ है. होर्मुज खुला हुआ है और अभी भी जहाज गुजर रहे हैं.
वहीं ईरानी मीडिया ने बताया कि होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे दो जहाजों पर हमला किया गया. हालांकि इस बात को भी अमेरिकी सेना की तरफ से झूठा करार दिया गया है. US सेंटकॉम की तरफ से एक और पोस्ट में कहा गया कि अमेरिका के किसी भी युद्धपोत पर हमला नहीं हुआ है.
ट्रंप ने पहले ही बता दिया था- हमला होगा
ऐसी स्थिति में तीन महीने से ज्यादा समय से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए चल रही बातचीत भी पटरी से उतरती नजर आ रही है. अमेरिकी आर्मी के इन हमलों से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान पर “जोरदार हमला” किया जाएगा. उनका आरोप है कि युद्ध समाप्त करने के लिए चल रही बातचीत में ईरान का रुख सहयोगी नहीं रहा और वार्ता आगे नहीं बढ़ पाई.
ट्रंप ने ईरानी वार्ताकारों पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे अमेरिका को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका ने एक दिन पहले भी कड़ा हमला किया था और अब फिर से ऐसा ही किया जाएगा. ट्रंप का कहना था कि दोनों पक्ष समझौते के बेहद करीब पहुंच गए थे, लेकिन बातचीत बार-बार आगे बढ़ने के बजाय अटक रही है.
अभी आगे भी जारी रहेगी जंग? संकेत मजबूत हैं
इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने संकेत दिया कि सैन्य कार्रवाई यहीं नहीं रुक सकती. उन्होंने कहा कि तीसरी रात भी हमले हो सकते हैं और यदि ऐसा हुआ तो वे “मजबूत” और “स्पष्ट” होंगे.
बढ़ती हिंसा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता भी तेज हो गई है. अमेरिका और अन्य देशों की मेजबानी में होने वाले फुटबॉल विश्व कप से ठीक पहले कई देशों और संगठनों ने संयम बरतने की अपील की है. ईरान भी इस टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहा है, इसलिए संघर्ष के बढ़ने से खेल आयोजन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने चेतावनी दी कि हालात दोबारा पूर्ण युद्ध (ऑल आउट वॉर) की दिशा में नहीं बढ़ने चाहिए. वहीं संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने ट्रंप की धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि धमकी, डराने या बल प्रयोग के जरिए कोई स्थायी समझौता नहीं हो सकता. लगातार बढ़ते हमलों और कूटनीतिक गतिरोध के बीच मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है.
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