धर्म

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी 2026: एक ही तारीख पर क्यों पड़ रहे दोनों महापर्व? जानें पंचांग


Hartalika Teej and Ganesh Chaturthi: हिंदू धर्म के दो बड़े पर्व हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी इस साल एक ही दिन 14 सितंबर को मनाए जाएंगे. तृतीया और चतुर्थी तिथि के एक ही तारीख पर पड़ने के चलते यह विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है.

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान (जयपुर–जोधपुर) के निदेशक, भविष्यवक्ता और कुंडली विश्लेषक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं, वहीं गणेश चतुर्थी पर घर-घर में गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित कर उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है. आमतौर पर गणेश चतुर्थी, हरतालिका तीज के अगले दिन आती है, लेकिन वर्ष 2026 में पंचांग की तिथियों के फेर से दोनों पर्व एक ही तारीख को पड़ेंगे.

एक ही दिन दोनों त्योहार: क्या है पंचांग गणना?

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया, 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे तक रहेगी. सूर्योदय के समय तृतीया तिथि होने के कारण (उदयातिथि के मान से) हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को ही रखा जाएगा.

चतुर्थी तिथि: सुबह 7:06 बजे से शुरू हो जाएगी. भगवान गणेश का जन्म चतुर्थी तिथि के मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए गणेश चतुर्थी भी इसी दिन मनाई जाएगी. गणपति पूजन के लिए मध्याह्न काल 14 सितंबर को ही उपलब्ध रहेगा.

हरतालिका तीज: अखंड सौभाग्य का निर्जला व्रत

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है. हरियाली और कजरी तीज के बाद आने वाला यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है, जिसमें महिलाएं और कुंवारी कन्याएं निर्जला व निराहार व्रत रखती हैं.

महत्व: भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन का विधान है. मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सबसे पहले यह तप और व्रत किया था.

तृतीया तिथि समय: शुरुआत 13 सितंबर को सुबह 7:08 बजे से होगी और समापन 14 सितंबर 2026 को सुबह 7:06 बजे होगा.

गणेश चतुर्थी: घर-घर पधारेंगे विघ्नहर्ता

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से 10 दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ होता है. इस साल गणेश स्थापना 14 सितंबर को होगी, जबकि गणेश विसर्जन 25 सितंबर (अनंत चतुर्दशी) को किया जाएगा.

शुभ योग और मुहूर्त: गणेश चतुर्थी पर ब्रह्म योग दोपहर 12:45 बजे तक और चित्रा नक्षत्र दोपहर 1:55 बजे तक रहेगा. ब्रह्म योग के दौरान मूर्ति स्थापना, संकल्प, मंत्र जाप और पूजन अत्यंत फलदायी माना गया है.

चतुर्थी तिथि समय: चतुर्थी तिथि 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि और मध्याह्न काल के अनुसार 14 सितंबर को ही गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा.

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