

एंथ्रोपिक (Anthropic) एक अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिक्योरिटी और रिसर्च कंपनी है. इसकी ताकत इतनी है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर अमेरिका ले आने वाले सैन्य अभियान में इसकी बड़ी भूमिका मानी गई. यहां तक की ईरान युद्ध में भी इसके इस्तेमाल की खबरें रहती हैं.
कंपनी का दावा
मगर अब खुद कंपनी की तरफ से एक खतरनाक दावा किया गया है. कंपनी ने आज ट्वीट कर बताया कि उसके वैज्ञानिक अवैध तरीके से बायोलॉजिकल हथियार बनाने में जुटे थे. मगर इससे पहले कि वो सफल हो पाते कंपनी ने उन्हें पकड़ लिया. कंपनी ने ट्वीट कर लिखा, ‘हम अब तक की अपनी सबसे डिटेल्ड ‘थ्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट’ पब्लिश कर रहे हैं. इसमें बताया गया है कि लोगों ने क्लाउड (Claude) का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश कैसे की—जैसे साइबर अटैक, इन्फ्लुएंस ऑपरेशन, सर्विलांस, बायोलॉजिकल हथियार बनाने के लिए—और हमने उन्हें कैसे पकड़ा और रोका. हमने रिपोर्ट में बताए गए हर ऑपरेशन को रोका और उनसे मिली सीख का इस्तेमाल अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए किया. जहां जरूरी था, हमने अपनी जानकारी अधिकारियों और दूसरी AI कंपनियों के साथ भी शेयर की.’
We’re publishing our most detailed threat intelligence report to date.
It covers how people tried to misuse Claude—for cyberattacks, influence operations, surveillance, biology, and building weapons—and how we found and stopped them.
We disrupted every operation in the report,…
— Anthropic (@AnthropicAI) September 10, 2026
कंपनी ने आगे बताया, ‘ये मामले आम नहीं हैं: हम कुछ ऐसे मामलों पर जोर दे रहे हैं जिनमें AI का बहुत ही चालाकी से गलत इस्तेमाल किया गया. लेकिन इन पर चर्चा करना इसलिए जरूरी है क्योंकि इनसे पता चलता है कि AI के गलत इस्तेमाल का ट्रेंड किस तरफ बढ़ रहा है, हमारी सुरक्षा व्यवस्था कहां काम कर रही है और कहां सुधार की जरूरत है. हम यह रिपोर्ट इसलिए पब्लिश कर रहे हैं ताकि दूसरे लोग भी अपने प्लेटफ़ॉर्म पर ऐसी गतिविधियों को पहचान सकें और हम जनता को यह साफ तौर पर दिखा सकें कि नए तरह के खतरे कैसे पैदा होते हैं.’
क्या किया था टेस्ट
एंथ्रोपिक के सुरक्षा वैज्ञानिकों और बायो-सिक्योरिटी विशेषज्ञों ने अपने एडवांस मॉडल (जैसे Claude 4 Opus) का परीक्षण किया कि क्या यह खतरनाक जैविक एजेंट बनाने में किसी आम इंसान या आतंकवादी की मदद कर सकता है. परीक्षण में पाया गया कि AI मॉडल न केवल खतरनाक वायरस (जैसे इन्फ्लुएंजा, चेचक आदि) के निर्माण की विधि बता सकता है, बल्कि यह सिंथेटिक डीएनए के ऑर्डर देने और लैब में आने वाली व्यावहारिक रुकावटों को हल करने में बिना किसी पूर्व विशेषज्ञता वाले व्यक्ति को भी सक्षम बना सकता है. इसके बाद एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई ने अमेरिकी सीनेट में गवाही देते हुए आधिकारिक तौर पर चेतावनी दी थी कि आगामी 2 से 3 वर्षों में AI टूल्स इतने शक्तिशाली हो जाएंगे कि वे बड़े पैमाने पर जैविक हमला करने के लिए आवश्यक तकनीकी जानकारी को किसी भी व्यक्ति तक आसानी से पहुंचा देंगे. यह मानवता के अस्तित्व के लिए सीधा खतरा है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कड़े सुरक्षा मानक और नियम नहीं बनाए गए, तो कोई भी आतंकी संगठन घर बैठे खतरनाक पैथोजन या सुपरवायरस डिजाइन कर सकता है.
रिसर्चर ने बताया खतरा
हाल ही में एंथ्रोपिक के AI सेफ्टी रिसर्चर ने यह कहते हुए कंपनी से इस्तीफा दिया कि दुनिया इस समय गंभीर खतरे की ओर बढ़ रही है. वैज्ञानिकों ने आगाह किया कि कंपनियां व्यावसायिक होड़ में सुरक्षा पैमानों से समझौता कर रही हैं, जिससे एआई-सक्षम जैविक हथियारों का खतरा वास्तविक होता जा रहा है. जेकब कॉक्सन ने एंथ्रोपिक और OpenAI दोनों में तीन साल तक रिसर्च की है. उन्होंने मंगलवार को सोशल प्लेटफॉर्म X पर कहा कि ये दोनों AI कंपनियाँ सुरक्षा से ज़्यादा इस बात पर ध्यान दे रही हैं कि वे एक-दूसरे और ग्लोबल कॉम्पिटिटर्स को पीछे छोड़कर सबसे एडवांस्ड मॉडल कैसे बनाएं. उन्होंने चेतावनी दी कि AI डेवलपमेंट पर काम करने वाले कुछ लोगों का मानना है कि इस दशक के आखिर तक यह इंसानी ज़िंदगी के लिए खतरा बन सकता है. उन्होंने आगे कहा, “इस टेक्नोलॉजी की ताकत को कम मत समझिए. ये जल्द ही ऐसे सुपरह्यूमन सिस्टम बन जाएंगे जो किसी भी चीज को हैक कर सकते हैं, रातों-रात किसी भी क्षेत्र में क्रांति ला सकते हैं, और असली ताकत और संसाधन हासिल कर सकते हैं. हमने इन सभी क्षेत्रों में तरक्की देखी है, और यह तरक्की धीमी नहीं हो रही है.”
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