खबर

जज रवि कुमार दिवाकर ने अब क‍िसको सुनाई फांसी की सजा? 4 महीने में 23वीं सजा, बोले- मरना पसंद करूंगा, डरपोक कहलाना नहीं | Judge Ravi Kumar Diwakar 23rd death sentence in four months said I would prefer to die rather than be called coward



मुजफ्फरनगर: जज रवि कुमार दिवाकर ने एक और फांसी की सजा सुनाई है. पिछले चार महीने में रव‍ि कुमार द्वारा सुनाई गई यह 23वीं फांसी की सजा है. उन्‍होंने मुजफ्फरनगर के चर्चित शहजादी हत्याकांड में दोषी पति नदीम को फांसी की सजा सुनाई है. इसके साथ ही उस पर एक लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया. मामला वर्ष 2018 का है. दहेज की मांग को लेकर विवाद के बीच नदीम ने अपनी पत्नी शहजादी को कथित तौर पर जिंदा जलाकर उसकी हत्या कर दी थी. घटना के बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था और उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर नदीम को दोषी ठहराया गया. 

फैसले में जज की टिप्पणी भी चर्चा में

फैसला सुनाते समय न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की टिप्पणी भी चर्चा में रही. उन्होंने अपने फैसले में लिखा, “मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलाना नहीं पसंद करूंगा.” उन्होंने आगे कहा कि जब तक वह अपने सिद्धांतों पर चल सकते हैं, तब तक सेवा करेंगे, अन्यथा त्यागपत्र देना पसंद करेंगे.  जज ने अपने फैसले में यह भी लिखा कि जब तक वह जज की कुर्सी पर हैं, तब तक फैसला लेने का अधिकार उनका है। उनकी इस टिप्पणी को न्यायिक दायित्व और अपने सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता के तौर पर देखा जा रहा है. 

यह वीड‍ियो भी देखें- 

10 चर्चित मामलों में 23 दोषियों को फांसी की सजा

जज रवि कुमार दिवाकर इससे पहले भी कई चर्चित मामलों में कड़े फैसले सुना चुके हैं. मुजफ्फरनगर में तैनाती के दौरान 6 अप्रैल से अब तक 10 चर्चित मामलों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने का दावा किया गया है. शहजादी हत्याकांड में सुनाया गया यह फैसला भी इसी कड़ी में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, फांसी की सजा के मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अपील का प्रावधान भी होता है. 

क्‍या है शहजादी हत्‍याकांड?

यह मामला 23 जुलाई 2018 को शाहपुर कस्बे में दहेज की मांग को लेकर नदीम द्वारा अपनी पत्नी शहजादी (23) को कथित तौर जला देने से संबंधित है. शहजादी को गंभीर हालत में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, जहां बाद में उसकी मौत हो गई थी. शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मौत से पहले दर्ज कराए गए बयान में शहजादी ने आरोप लगाया था कि नदीम ने उसे जलाया था. उन्होंने बताया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के सभी 11 गवाह मुकर गए, लेकिन अदालत ने शहजादी के मौत से पहले बयान के आधार पर नदीम को दोषी ठहराया. शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि न्यायाधीश दिवाकर की अदालत ने पिछले चार महीनों में 11 मामलों में 23 लोगों को मृत्युदंड दिया है.

इससे पहले अगस्त में, दिवाकर के समक्ष लंबित हत्या के लगभग 100 मामलों को एक प्रशासनिक आदेश के माध्यम से जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया थ. जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा था कि मामलों का स्थानांतरण वकीलों और वादियों के बीच त्वरित अदालत द्वारा मृत्युदंड दिए जाने की आशंका के बीच हुआ.

यह भी पढ़ें- 22 को मौत की सजा सुनाने वाले जज की कोर्ट से 100 मर्डर केस ट्रांसफर; जानिए कौन हैं रवि कुमार दिवाकर?





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button