
नई दिल्ली:
बिहार में इस साल फिर बाढ़ आई है… पिछले साल भी आई थी… और उसके पहले वाले साल भी… सिर्फ साल बदलता है लेकिन बिहार वालों की किस्मत नहीं. हर साल यहां के लाखों लोग बाढ़ से जूझते हैं. हजारों की जान चली जाती है. हजारों एकड़ जमीन तबाह हो जाती है.
इस साल भी बिहार भयानक बाढ़ से जूझ रहा है. अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया है और बिहार के 13 जिलों में बाढ़ आ गई है. 27 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. सितबंर में ही सोमवार सुबह तक 69.1 मिमी बारिश हुई है जो सामान्य से 55% ज्यादा है.
न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, बिहार की सात नदियां उफान पर हैं. सातों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. कुछ जगहों पर पानी कम हो रहा है. लेकिन हालात गंभीर बने हुए हैं.
बिहार में अभी कैसे हैं हालात?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार में बाढ़ के कारण 16 जिले बुरी तरह प्रभावित हैं. इनमें से 14 जिलों में गंभीर हालात बने हुए हैं. जिन जिलों में हालात गंभीर हैं, उनमें राजधानी पटना भी शामिल है.
अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ के कारण 27 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. बाढ़ प्रभावित अलग-अलग जिलों में 190 कम्युनिटी किचन चल रही हैं, जबकि राहत और बचाव के लिए 1,429 नावें लगाई गई हैं.
बाढ़ की वजह भारी बारिश है. सितंबर में ही 55% से ज्यादा बारिश हो चुकी है. इस कारण नदियां उफान पर हैं और खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं.

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पटना के गांधी घाट पर सोमवार सुबह 6 बजे गंगा नदी 50.41 मीटर के स्तर पर बह रही थी, जो खतरे के निशान से 1.57 मीटर ऊपर है.
अधिकारियों ने बताया कि गंडक नदी डुमरियाघाट और हाजीपुर में, कोसी नदी बलतारा और कुरसेला में, बूढ़ी गंडक खगड़िया में, गंगा नदी हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में, पुनपुन नदी श्रीपालपुर में, बागमती नदी बेनीबाद में और घाघरा नदी दरौली में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.
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बिहार में हर साल की यही कहानी
जो लोग बिहार में रहते हैं, उनके लिए बाढ़ अब ‘न्यू नॉर्मल’ हो गई है, क्योंकि यहां हर साल की यही कहानी है. तमाम तरीकों और उपायों के बावजूद बिहार में हर साल बाढ़ तबाही मचाती है.
दिलचस्प बात यह है कि बिहार में बाढ़ बिहार में होने वाली बारिश से नहीं, बल्कि नेपाल, झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में होने वाली बारिश की वजह से आती है. बिहार सरकार के मुताबिक, 38 में से 28 जिले हर साल बाढ़ की चपेट में आते हैं. इनमें से 21 जिले उत्तर बिहार और 7 दक्षिण बिहार में हैं.
बिहार की भौगोलिक बनावट ऐसी है जो इसे बाढ़ के लिए और ज्यादा संवेदनशील बनाती है. बिहार की बनावट ‘कटोरी’ जैसी है. ऊपर पहाड़ियों से पानी आता है, नीचे जमा होता है और बिहार में बाढ़ लाता है.

बिहार सरकार के मुताबिक, नेपाल से निकलने वाली नदियां अपने साथ भारी मात्रा में गाद लाती हैं, जो बिहार के मैदानी इलाकों में जमा हो जाती है. इस इलाके में ज्यादातर बारिश के कारण नदियों 50 गुना ज्यादा तेजी से बहती हैं और बिहार में बाढ़ आ जाती है.
आंकड़ों में समझें तो बिहार के कुल 94,160 वर्ग किलोमीटर में से लगभग 68,800 वर्ग किलोमीटर इलाका बाढ़ की चपेट में रहता है. यानी, बिहार का कुल 73% हिस्से पर हर साल बाढ़ का खतरा मंडराता रहता है. इसका मतलब हुआ कि बिहार में देश की 22% से ज्यादा ऐसी आबादी रहती है जो हर साल बाढ़ की चपेट में आती है.
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लेकिन ऐसा क्यों?
बिहार में ज्यादातर बाढ़ नेपाल की वजह से आती है, जहां से कई नदियां राज्य में बहकर आती हैं. इसके अलावा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड में आने वाली बाढ़ भी बिहार के कई जिलों में तबाही मचाती है.
नेपाल में बारिश से कोसी नदी का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे सुपौल और सहरसा जिले सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. महानंदा और कनकई नदियों का बढ़ता जलस्तर अररिया और किशनगंज को प्रभावित करता है. इसी तरह, कोसी और महानंदा नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर पूर्णिया, कटिहार और मधेपुरा में भी दिखता है. पश्चिमी चंपारण में गंडक नदी, पूर्वी चंपारण में बूढ़ी गंडक नदी, सीतामढ़ी में बागमती और मधुबनी में कमला बलान नदी में भी बाढ़ का पानी फैल जाता है.
उत्तर प्रदेश से बहने वाली कई नदियां बिहार में भी आती हैं. जब यूपी में भारी बारिश होती है और पानी का स्तर बढ़ता है, तो यह पानी बिहार के सारण, बक्सर, भोजपुर, गोपालगंज, सिवान और पश्चिमी चंपारण जिलों में पहुंचता है. इससे गंगा, गंडक, घाघरा, बूढ़ी गंडक और कर्मनाशा नदियां उफान पर आ जाती हैं.

जब उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों और उत्तराखंड से सटे पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश होती है, तो गंगा और उसकी सहायक नदियां उफान पर आ जाती हैं. इससे बक्सर, भोजपुर, पटना और भागलपुर में बाढ़ आती है.
इसी तरह, झारखंड में भारी बारिश के कारण बिहार में बहने वाली सोन, पुनपुन और लोकायन नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है. इससे पटना, भोजपुर और भागलपुर जिले प्रभावित होते हैं.
इसके अलावा, मध्य प्रदेश में भारी बारिश से दक्षिणी बिहार के कुछ हिस्सों में बहने वाली सोन, पुनपुन और कर्मनाशा नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है.
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सबसे ज्यादा तबाही लाती है कोसी!
बिहार के मैदानी इलाके नेपाल से सटे हुए हैं. कोसी, बागमती, गंडक और कमला बलान जैसी नदियां नेपाल से होकर बिहार में आती हैं. इसलिए, जब नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बारिश होती है, तो नदियों का पानी बिहार के आस-पास के इलाकों में बहकर आता है.
इन नदियों में कोसी सबसे ज्यादा तबाही मचाती है क्योंकि नेपाल से कई नदियां इसी में आकर मिलती हैं. नतीजतन, भारी बारिश के दौरान कोसी नदी का जलस्तर काफी बढ़ जाता है. इससे कोसी-पूर्णिया, मिथिला और चंपारण इलाकों में भारी तबाही होती है.
बिहार की नदियों में गाद का जमा होना भी बाढ़ का एक बड़ा कारण है. नदियों में गाद जमा होने से नदी की तलहटी ऊपर उठ जाती है और पानी रोकने की क्षमता कम हो जाती है. जब पानी का स्तर बढ़ता है, तो पानी तेजी से किनारों को तोड़कर मैदानी इलाकों में फैलने लगता है.

कितनी तबाही लाती है बाढ़?
बिहार में पिछले दशकों में नदियां फैलती जा रही हैं. 1954 में बिहार में नदियों के किनारे तटबंधों की लंबाई मात्र 160 किलोमीटर थी और बाढ़ का खतरा करीब 25 लाख हेक्टेयर जमीन पर था. लेकिन आज इसकी लंबाई 3,800 किलोमीटर हो चुकी है और बाढ़ प्रभावित इलाका 69 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है.
बीते कई सालों में बिहार ने कई भीषण बाढ़ देखी है. 1978, 1987, 1998, 2004, 2007, 2008, 2013 और 2017 में बिहार ने बहुत भयानक बाढ़ का सामना किया है. बीते 26 साल में सबसे खतरनाक बाढ़ 2007 में आई थी. उस साल बाढ़ से 1,287 लोगों की मौत हो गई थी. 2004 में 885 तो 2017 में 815 लोगों की जान चली गई थी.
साल 2025 में बाढ़ से 17 लाख लोग प्रभावित हुए थे. बिहार सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र से 3,600 करोड़ रुपये की मांग की. 2024 में भी बिहार सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र से 3,638 करोड़ रुपये से ज्यादा की मांग की थी.
बिहार में अभी 14 जिलों में हालात गंभीर बने हुए हैं. लाखों लोग प्रभावित हैं. नदियां उफान पर हैं. कुछ दिन तक तो बाढ़ से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. लेकिन अच्छी बात है कि अब लोगों को जल्दी निकाल लिया जाता है, जिससे लोगों की जान बच जाती है.
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