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SSB में 10 बार हुआ फेल, फ‍िर लेफ्टिनेंट बनकर ही माना बिहार का लड़का, हार को जीत में कैसे बदला? | vijeta vishal ssb failure success story bihar lieutenant


Success Story Bihar: बिहार के विजेता विशाल की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो एक-दो बार असफल होने पर हार मान जाते हैं और अपने लक्ष्य का पीछा करना छोड़ देते हैं. असफलता यदि एक या दो बार मिले तो हौसला टूटना स्वाभाविक है, लेकिन लगातार 10 बार नाकामी मिलने के बाद भी अपने लक्ष्य पर टिके रहना आसान नहीं होता.

बिहार के नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड स्थित डोहरा गांव के निवासी विजेता विशाल भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं. विजेता ने संघ लोक सेवा आयोग की कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद उन्होंने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में कठिन प्रशिक्षण पूरा किया. प्रशिक्षण के उपरांत आयोजित ‘पासिंग आउट परेड’ में जब उनके कंधों पर अधिकारी के सितारे सजे, तो उनके वर्षों के संघर्ष और सपने दोनों पूरे हो गए.

10 बार SSB में असफलता, फिर भी नहीं मानी हार

विजेता की सफलता की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्हें SSB इंटरव्यू में लगातार 10 बार नाकामी का सामना करना पड़ा. हर बार परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया, लेकिन उन्होंने इसे अपने लक्ष्य से पीछे हटने का कारण नहीं बनने दिया. प्रत्येक असफल प्रयास के बाद उन्होंने अपनी कमियों का विश्लेषण किया और उन्हें दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया. परिवार के सहयोग और पिता के अनुशासित मार्गदर्शन ने भी उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. आखिरकार 11वें प्रयास में उनकी लगन और मेहनत रंग लाई. 

vijeta vishal ssb failure success story bihar lieutenant

बिहार के नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड स्थित डोहरा गांव के निवासी विजेता विशाल भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं.

पिता स्वयं सेना में थे, बेटे को अधिकारी बनाने का देखा था सपना

विजेता के पिता धनंजय कुमार धीरज भारतीय सेना की बिहार रेजीमेंट की सातवीं बटालियन में नायब सूबेदार के पद पर सेवा दे चुके हैं. उनका स्वयं सेना में अधिकारी बनने का सपना था, लेकिन वे जेसीओ के पद तक ही पहुंच सके. इसके बाद उन्होंने अपने बेटे को सेना में अधिकारी बनाने का संकल्प लिया. विजेता ने भी अपने पिता की इस इच्छा को अपना जीवन-लक्ष्य बना लिया. पिता ने उन्हें अनुशासन और निरंतर परिश्रम के साथ तैयारी करने के लिए सदा प्रेरित किया. विजेता ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सैनिक स्कूल नालंदा से पूरी की और इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की. स्नातक के तुरंत बाद वे सेना में अधिकारी बनने की तैयारी में जुट गए थे. 

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चेन्नई OTA की पासिंग आउट परेड का भावुक क्षण

विजेता की सफलता का सबसे भावुक क्षण चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी की पासिंग आउट परेड के दौरान आया. भारतीय सेना की अधिकारी वर्दी में अपने बेटे को देखना पिता धनंजय कुमार धीरज के लिए अत्यंत गर्व का क्षण था. सैन्य प्रोटोकॉल के अनुसार, नायब सूबेदार रहे पिता ने अपने अधिकारी बेटे को औपचारिक सलामी दी. पिता की सलामी स्वीकार करने के तुरंत बाद विजेता ने झुककर उनके चरण स्पर्श किए और आशीर्वाद लिया. पिता और पुत्र के लिए यह केवल एक पासिंग आउट परेड नहीं थी, बल्कि वर्षों के संघर्ष और एक अधूरे सपने के साकार होने का ऐतिहासिक पल था. जिस बेटे को पिता ने अनुशासन और कठोर परिश्रम का पाठ पढ़ाया, उसी बेटे को अधिकारी की वर्दी में देखकर सलामी देना उनके लिए अत्यंत भावुक कर देने वाला पल बन गया.   

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