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ऑनलाइन ऑर्डर हुई ऑक्सीजन, ग्रीन कॉरिडोर तैयार… सत्य निकेतन पर ऐसे हो रहा रेस्क्यू | Oxygen ordered online green corridor ready Here is how the rescue operation is unfolding at Satya Niketan



दिल्ली के सत्य निकेतन में ढही इमारत को लेकर कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं. बताया जा रहा है कि करीब 40-50 साल पुरानी इस इमारत को एक साल पहले खाली करा दिया गया था, लेकिन दो-तीन महीने पहले यहां फिर से PG शुरू कर दिया गया. इमारत में करीब 10 कमरे थे और नीचे मेडिकल स्टोर भी संचालित हो रहा था.

मलबे में फंसे लोगों को बचाने की जंग

हादसे के बाद दिल्ली पुलिस, NDRF, फायर सर्विस और अन्य एजेंसियों ने राहत अभियान शुरू किया. अब तक 6 लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल भेजा गया है. मलबे में फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए Blinkit एम्बुलेंस के जरिए ऑक्सीजन सिलेंडर भी मंगाए गए. रेस्क्यू टीम लगातार लोगों की तलाश में जुटी है.

इसके अलावा एक ग्रीन कॉरिडोर भी तैयार कर दिया गया है जिससे समय रहते घायलों को अस्पताल ले जाया सके और जरा सा भी वक्त जाया नहा हो. बताया जा रहा है कि मलबे के नीचे कई छात्र फंसे हैं जो चिल्ला रहे हैं, उनकी आवाज सुन ही एनडीआरएफ की टीमें उन्हें बाहर निकालने की कोशिश कर रही हैं. कुछ छात्र तो ऐसे भी हैं जो मलबे के नीचे से ही कॉल कर मदद की गुहार लगा रहे हैं.

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी ग्राउंड पर पहुंच स्थिति का जायजा लिया है. उनकी तरफ से रेस्क्यू तेज करने के निर्देश दिए गए हैं और वे अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं. जानकारी मिल रही है कि जो पीजी इस इमारत में संचालित हो रहा था, वहां पूर्वोत्तर के ज्यादा छात्र मौजूद थे.

जहां हुआ हादसा, कैसी है वो जगह?

अब जिस सत्य निकेतन में यह हादसा हुआ है, वहां बड़ी संख्या में PG, रेंटेड रूम और हॉस्टल संचालित होते हैं. दरअसल, सत्य निकेतन इलाके को DU साउथ कैंपस के आसपास का एक बड़ा स्टूडेंट हब माना जाता है. यह साउथ-वेस्ट दिल्ली में पड़ता है और धौला कुआं, मोती बाग, आरके पुरम और आनंद निकेतन वाले बेल्ट के काफी करीब है.

कौन-कौन से कॉलेज पास हैं?

यहां श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज, मैत्रेयी कॉलेज, DU South Campus और दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैंपस मेट्रो मौजूद हैं. इसी वजह से पूरे इलाके में बड़ी संख्या में छात्रों की आवाजाही और मौजूदगी देखने को मिलती है.

जिस जगह यह हादसा हुआ है, वहां भी धड़ल्ले से PG और रेंटेड रूम संचालित हो रहे थे. इसके अलावा, इसी इलाके में कई और PG और हॉस्टल मौजूद हैं. यानी यह सिर्फ एक सामान्य रिहायशी कॉलोनी नहीं है, बल्कि स्टूडेंट अकोमोडेशन के लिए भी एक बड़ा हब है. अगर इलाके की भौगोलिक स्थिति की बात करें, तो यहां छोटी-छोटी गलियां हैं और घनी आबादी के बीच कई बहुमंजिला मकान मौजूद हैं.




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