धर्म

बारिश में भी नहीं थमा आस्था का सैलाब, जन्माष्टमी पर गूंजे गोगाजी के जयकारे; आज निकलेगी भव्य निशान ध्वजा यात्रा


राजस्थान के सीकर जिले के लोसल कस्बे में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. यहां स्थित लोकदेवता श्री गोगाजी महाराज के मंदिर में दिनभर धार्मिक कार्यक्रमों का तांता लगा रहा. रात होते-होते मौसम ने करवट ली और तेज बारिश शुरू हो गई, लेकिन बादलों की फुहारें भी श्रद्धालुओं की भक्ति और उत्साह को डिगा नहीं पाईं.

देर रात मंदिर चौक पर सजा पारंपरिक अखाड़ा लोगों के बीच आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहा.

ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरके भक्त, अखाड़े में दिखा अद्भुत नजारा

रात के समय मंदिर परिसर और मुख्य चौक पर जब गोगाजी महाराज का अखाड़ा शुरू हुआ, तो माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो उठा. ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की तेज आवाज के बीच भक्त झूमते-गाते दिखाई दिए.

अखाड़े के दौरान कई श्रद्धालुओं ने अपनी अटूट आस्था का परिचय दिया. पुरानी मान्यताओं के अनुसार, भक्तों ने लोहे की जंजीरों (सांकल) से अपने शरीर और सिर पर प्रहार कर लोकदेवता के प्रति समर्पण दिखाया. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा यहां कई पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे गोगाजी महाराज के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है. देर रात तक लगातार बारिश होने के बावजूद अखाड़े में मौजूद भीड़ टस से मस नहीं हुई.

मंदिर से जुड़ी है अनोखी मान्यता

लोसल के इस प्रसिद्ध मंदिर को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में गहरी आस्था है. बुजुर्गों के अनुसार, मंदिर से एक पुराना किस्सा जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि कई वर्ष पहले मंदिर के पुराने पुजारी को एक जहरीले सांप ने डस लिया था. गोगाजी महाराज की कृपा से पुजारी को कुछ नहीं हुआ, बल्कि सांप की वहीं मृत्यु हो गई. इस घटना के बाद से ही आसपास के दर्जनों गांवों में इस धाम को लेकर आस्था और अधिक गहरी हो गई.

गौरतलब है कि राजस्थान के लोकदेवता गोगाजी महाराज को सांपों के देवता और गोरक्षक के रूप में पूजा जाता है. उनका जन्म चूरू जिले के ददरेवा धाम में हुआ था और मुख्य समाधि स्थल हनुमानगढ़ जिले के गोगामेड़ी में स्थित है.

आज शहर में धूमधाम से निकलेगी निशान ध्वजा यात्रा

जन्माष्टमी के सफल आयोजन के बाद आज कस्बे में गोगाजी महाराज की भव्य निशान ध्वजा यात्रा निकाली जा रही है. यात्रा मंदिर परिसर से शुरू होकर लोसल कस्बे के प्रमुख बाजारों और मुख्य रास्तों से गुजरेगी.

यात्रा को लेकर स्थानीय नागरिकों और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. पूरे रास्ते में जगह-जगह पुष्प वर्षा और स्वागत की तैयारियां की गई हैं. श्रद्धालु हाथों में रंग-बिरंगे ध्वज (निशान) थामे, डीजे और ढोल-नगाड़ों की धुन पर जयकारे लगाते हुए चलेंगे. शाम को यात्रा पुनः मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना के साथ संपन्न होगी.

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