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मुकेश खन्ना ने शर्मिला टैगोर के वंदे मातरम् कमेंट पर दिया रिएक्शन, बोले- शादी के लिए आप आयशा बेगम बन गईं | Mukesh Khanna to Sharmila Tagore on Vande Mataram Remark said You Became Ayesha Begum For Marriage



नई दिल्ली:

मुकेश खन्ना एक बार फिर अपने कॉन्टोवर्शियल बयान के कारण चर्चा में आ गए हैं. दरअसल, उन्होंने हाल ही में ‘वंदे मातरम’ और शर्मिला टैगोर की उस टिप्पणी पर अपनी राय रखी, जिसमें उन्होंने राष्ट्रगीत को पूरा गाने की बात कही थी. ‘शक्तिमान’ और महाभारत में ‘भीष्म पितामाह जैसे किरदारों के लिए जाने जाने वाले मुकेश खन्ना ने फ्री प्रैस जर्नल को दिए इंटरव्यू में में कहा, “वह अपनी समझ के हिसाब से बात कर रही हैं. मुझे नहीं पता कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा. हो सकता है कि अपनी बात समझाते हुए उन्होंने यह कह दिया हो कि दूसरे धर्मों के लोग शायद इसे न समझें या न मानें.”

मुकेश खन्ना ने शर्मिला टैगोर को कहा आयशा बेगम

आगे मुकेश खन्ना ने शर्मिला टैगोर के वंदे मातरम डिबेट पर सवाल उठाते हुए उनकी पटौदी फैमिली में शादी का जिक्र किया और उन्हें आयशा बेगम कहते हुए कहा, “क्या आपको शादी के बाद ही पता चला कि इस्लाम भी कोई धर्म है? जब आप बेगम बनीं, तब क्या आपको एहसास हुआ कि मुसलमान अलग धर्म को मानते हैं? शादी के लिए आप आयशा बेगम बनीं, लेकिन आज आप आयशा बेगम के तौर पर ही बात कर रही हैं. मुझे हैरानी है कि जिंदगी भर हिंदू धर्म के साथ रहने के बाद, अचानक आपको दूसरे धर्मों की चिंता होने लगी है.”

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शर्मिला टैगोर के बंगाली बैकग्राउंड पर भी कही ये बात

मुकेश खन्ना ने शर्मिला टैगोर के बंगाली बैकग्राउंड के बारे में बात करते हुए कहा, “आप बंगाल में बड़े हुए हैं, जहां काली पूजा इतने बड़े पैमाने पर मनाई जाती है. आप बंगाली संस्कृति और बंगाली फिल्मों के बीच पले-बढ़े हैं. आपको ऐसा क्यों लग रहा है कि दूसरे धर्म के लोग इसे शायद स्वीकार न करें? उनकी आपत्ति आज शुरू नहीं हुई है. उनका तर्क यह रहा है कि वे सिर्फ खुदा के सामने ही झुकते हैं और इसलिए किसी और के सामने नहीं झुकेंगे.”

शर्मिला टैगोर ने क्या कहा था? 

आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में शर्मिला टैगोर ने कहा, ‘मेरा मानना ​​है कि कई धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं, न कि कई देवताओं में. ‘वंदे मातरम’ में एक पद है, जिसमें कई देवताओं का जिक्र किया गया है. जो लोग एक ही धर्म को मानते हैं उनके लिए ‘वन्दे काली, वन्दे दुर्गा’ कहना मुश्किल है. इसलिए, अगर हम भारत के सभी धर्मों के लोगों को साथ लेकर चलें तो शुरुआती दो पद बहुत अच्छे हैं.’

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