

आज यानी 5 सितंबर को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा दही हांडी का पर्व मनाया जा रहा है. जन्माष्टमी के अगले दिन मनाए जाने वाले इस पर्व में कान्हा की माखन चोरी की नटखट लीला को याद किया जाता है. जगब-जगह गोविंदा की टोलियां एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर मानव पिरामिड बनाती हैं और मटकी फोड़ती हैं. देश के कई हिस्सों में इसकी रौनक देखने को मिलती है, खासकर महाराष्ट्र में यह उत्सव खूब धूमधाम से मनाया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं ये पर्व जन्माष्टमी के अगले दिन क्यों मनाया जाता है, साथ ही जानेंगे दही हांडी पर पूजा कैसे करें और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा-
जन्माष्टमी के अगले दिन क्यों मनाया जाता है दही हांडी का पर्व?
जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का मुख्य अनुष्ठान किया जाता है. इसके बाद अगले दिन उनके बाल स्वरूप और नटखटपन की लीलाओं का उत्सव मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, कान्हा को माखन बहुत पसंद था. वे अक्सर गोपियों के घर से माखन चुरा लिया करते थे. कान्हा की माखन चोरी से परेशान होकर गोपियां मटकी को जमीन से ऊंचाई पर लटकाने लगीं, ताकि कृष्ण वहां तक न पहुंच सकें, लेकिन नटखट कान्हा कहां मानने वाले थे. वे अपने दोस्तों को साथ लेकर आते और सभी मिलकर एक-दूसरे के ऊपर चढ़ते थे. इस तरह वे मानव पिरामिड बनाते थे. सबसे ऊपर पहुंचने वाला साथी मटकी को फोड़ देता था. इसके बाद सभी मिलकर दही और माखन का आनंद लेते थे. इसी बाल लीला की याद में दही हांडी का पर्व मनाया जाता है. कई जगह इसे गोपालकाला भी कहा जाता है.
दही हांडी पर ऐसे करें पूजा
- दही हांडी के दिन सुबह स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण या लड्डू गोपाल की पूजा करें.
- सबसे पहले भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं. इसके बाद उन्हें साफ जल से स्नान करा नए कपड़े पहनाएं.
- मुकुट, बांसुरी और चंदन का तिलक लगाकर उनका सुंदर श्रृंगार करें.
- इसके बाद कान्हा को सजाए हुए झूले में बैठाएं और श्रद्धा से उन्हें झूला झुलाएं.
- एक छोटी मटकी में दही, मक्खन, पोहा, सूखे मेवे और कुछ सिक्के डालकर पूजा घर में रखें.
- भगवान को मक्खन-मिश्री, पंचमेवा और गोपालकाला का भोग लगाएं.
- अंत में घी का दीपक और कपूर जलाकर भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें.
- पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद सभी लोगों में बांटें.
पूजा का शुभ मुहूर्त
आज वज्र योग रहेगा. अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है. इस समय आप पूजा-पाठ और अन्य शुभ काम कर सकते हैं. अमृत काल दोपहर 1 बजकर 16 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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